हिंदी लेखिका संघ की मासिक बाल साहित्य गोष्ठी

भोपाल। नवदुनिया रिपोर्टर

हिंदी लेखिका संघ की मासिक बाल साहित्य गोष्ठी मंगलवार को आर्यसमाज भवन में आयोजित हुई। गोष्ठी की विशिष्ठ अतिथि इंदिरा त्रिवेदी, साहित्यकार आशा शर्मा थीं। मुख्य अतिथि बाल शोध केंद्र के निदेशक महेश सक्सेना थे। जबकि अध्यक्षता वरिष्ठ बाल साहित्यकार मालती बसंत ने की। कार्यक्रम में लेखिका संघ में आठ नई सदस्य शामिल हुईं। आशा शर्मा ने 'चिड़िया चहचहाई नहीं' बाल कविता सुनाई। विशिष्ठ अतिथि इंदिरा त्रिवेदी ने अपने उद्बोधन में कहा कि बच्चों की उम्र, परिवेश, मनोविज्ञान को समझते हुए शिक्षाप्रद कहानियां लिखना सभी लेखिकाओं की महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

बच्चों को राह दिखाना हमारा कर्तव्य

हिंदी लेखिका संघ की अध्यक्ष अनीता सक्सेना ने कहा कि हमें बाल साहित्य में दादी-नानी की पुरातन कहानियों को भी धरोहर के रूप में सहेजना होगा। मुख्य अतिथि महेश सक्सेना ने कहा कि बच्चे हमारे वर्तमान, भविष्य हैं उनको सही राह दिखाना जरूरी है। बाल कविताएं लयबद्घ होनी चाहिए। नाटक बाल साहित्य का मुख्य अंग है। लोरी लिखने पर जोर दें। कहानी के माध्यम से बच्चों को सकारात्मक बनाएं। लेखिका संघ के स्थापना दिवस पर लेखिकाओं द्वारा मंचित नाटक 'हम नहीं सुधरेंगे' में अभिनय करने वाली लेखिकाओं को सम्मानित किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहीं मालती बसंत ने 'बच्चे बड़े होना चाहते हैं' कविता सुनाकर लेखिकाओं को बाल साहित्य लिखने को प्रेरित किया। गोष्ठी में उपस्थित लेखिकाओं ने बच्चों को प्रोत्साहित और शिक्षा देती हुई मनोरंजक कविताओं का पाठ किया।

Posted By: Nai Dunia News Network