भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। आज ज्‍येष्‍ठ मास की पहली एकादशी है। ज्‍येष्‍ठ कृष्‍ण पक्ष एकादशी को अपरा या अचला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्‍व है। इस दिन भगवान विष्‍णु की पूजा करने का विधान है। आज गुरुवार भी है, जिसे भगवान विष्‍णु का दिवस माना जाता है। लिहाजा, इस अचला एकादशी का महत्‍व और भी बढ़ जाता है। मान्‍यता है कि इस दिन व्रत का संकल्‍प लेकर भगवान विष्‍णु और देवी लक्ष्‍मी की पूजा से मनुष्य को सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। आज ग्रहो के कुछ मंगलकारी योग भी बन रहे हैं, जिससे इस एकादशी व्रत का कई गुना पुण्‍य फल मिलेगा।

ज्‍योतिषाचार्य पंडित रामजीवन दुबे ने बताया कि आज सर्वार्थसिद्धि योग व रेवती नक्षत्र है। सर्वाथसिद्धि योग सुबह 05:26 बजे से दूसरे दिन 27 को 05:26 तक रहेगा। इसके अलावा सूर्य व बुध की युति से बुधादित्य योग, गुरु-चंद्र-मंगल की युति से गजकेसरी व महालक्ष्मी योग का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही आयुष्मान और मित्र नाम के शुभ योग भी बन रहे हैं।

मुहूर्त

यूं तो ज्‍येष्‍ठ एकादशी तिथि का प्रारंभ 25 मई बुधवार को सुबह 10:32 बजे से हो चुका है, जो 26 मई गुरुवार को सुबह 10:54 तक रहेगी। उदया तिथि के हिसाब आज एकादशी का व्रत रखा जाएगा। व्रत का पारण 27 मई दिन शुक्रवार को सुबह 5:30 से 8:05 तक होगा।

पूजा विधि

सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्‍नान करें। साफ वस्‍त्र धारण करें और एकादशी व्रत का संकल्‍प लें। इसके बाद घर में पूजा के स्‍थान पर चौकी स्‍थापित कर साफ कपड़ा बिछाएं। भगवान विष्‍णु व लक्ष्‍मी जी की प्रतिमा या तस्‍वीर स्‍थापित करें। घी का दीप जलाते हुए कलश स्‍थापित करें। भगवान को गंगाजल से स्‍नान कराएं। उनकी पंचोपचार (कुंकुम, चावल, रोली, अबीर, गुलाल) पूजा करें। पुष्‍प, नैवेद्य अर्पित करे। एकादशी व्रत कथा का पाठ करें। इसके बाद विधिपूर्वक पूर्वक दिन भर उपवास करें। अगले दिन व्रत का पारण करें।

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Posted By: Ravindra Soni

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