भोपाल। मध्य प्रदेश में कांग्रेस के नेताओं की सक्रियता प्रदेश या जिलास्तर तक ही सीमित होकर रह गई है। निचले स्तर पर काम करने वाले संगठन तो हैं, लेकिन इनकी सक्रियता पर अंकुश लग गया है। पार्टी नेताओं की निचले स्तर पर की गई अनदेखी का परिणाम यह हुआ कि सेक्टर, मंडलम् और ब्लाक में संगठन की गतिविधियां लगभग ठप हो गई हैं।

जल्द ही होने वाले नगरीय निकाय चुनाव में निचले स्तर के संगठन ही निर्णायक भूमिका निभाएंगे। भारतीय जनता पार्टी की ओर से सभी आवश्यक तैयारियों के बीच कांग्रेस में इस व्यवस्था का अभाव है। निकाय चुनाव में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। स्थानीय स्तर पर संगठन कमजोर होने का खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ सकता है।

पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कई नेताओं को जिला और प्रदेश स्तर की कार्यकारिणी में जगह मिल जाती है। सभी गुटों के नेताओं को संतुष्ट करने की नीति के चलते कार्यकारिणी काफी बड़ी हो जाती है। इनमें कई लोग सिर्फ पद लेकर बैठ जाते हैं और संगठन के लिए काम नहीं करते। यह काम लंबे समय से चल रहा है। इससे पार्टी को दो स्तर पर नुकसान हो रहा है। पहला-योग्य कार्यकर्ताओं को स्थान नहीं मिल पाता और दूसरा-पद पर होने के बावजूद गुटबाजी से होकर आते पदाधिकारी संगठन के काम में रूचि नहीं लेते।

बदलाव की सुगबुगाहट

मध्य प्रदेश में सत्ता गंवाने और फिर उपचुनाव में करारी शिकस्त के बाद पार्टी में बदलाव को लेकर आवाजें उठने लगी है। प्रदेश नेतृत्व के संज्ञान में यह जानकारी है और इसलिए कहा जा रहा है कि अब संगठन की कार्यप्रणाली में बदलाव किया जाएगा। कार्यकारिणी का स्वरूप छोटा रखा जाएगा, ताकि जिम्मेदारी तय की जा सके। पार्टी नेता अधिकृत तौर पर तो इस बारे में कहने से बचते हैं, लेकिन उनका कहना है कि जल्द ही कांग्रेस में उन लोगों की पूछपरख बढ़ेगी, जो लगातार काम कर रहे हैं। निचले स्तर पर भी संगठन को मजबूत बनाया जाएगा।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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