भोपाल। बिहार में चमकी बुखार से 120 बच्चों की मौत के बाद मप्र के स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने सभी सीएमएएचओ व सिविल सर्जन का अलर्ट रहने के लिए कहा है। मंत्री ने यह निर्देश देवास जिले के जामनेर गांव के नौ साल के बच्चे की बुखार से मौत के बाद दिए हैं। हालांकि, जांच के बाद इंदौर के सीएमएचओ डॉ. प्रवीण जड़िया ने कहा कि बच्चे की मौत चमकी बुखार से नहीं हुई है। डॉ. जड़िया ने कहा है कि बच्चे को वायरल व दिमागी बुखार था न कि चमकी बुखार।

पहले इस बच्चे को चमकी बुखार का संदिग्ध माना जा रहा था। मौत के बाद मंत्री के निर्देश पर डॉक्टरों की टीम बच्चे के घर पहुंची। जांच रिपोर्ट्स देखी गईं। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने साफ किया है प्रदेश में इस बीमारी कोई संदिग्ध नहीं है। स्वास्थ्य संचालनालय में डिप्टी डायरेक्टर डॉ. हिमांशु जायसवार ने कहा कि सोमवार को चमकी बुखार को लेकर सभी सीएमएचओ व सिविल सर्जन को गाइडलाइन जारी की जाएगी।

क्या है चमकी बुखार ?

इसे एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) कहा जाता है। यह बीमारी नर्वस सिस्टम यानी तंत्रिका तंत्र पर असर डालती है। इस वजह से दिमाग में सूजन हो जाती है। एईएस की एक वजह जापानी बुखार का वायरस है, लेकिन अन्य वायरस, बैक्टीरिया और फंगस के संक्रमण से यह बीमारी हो सकती है। अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि कौन-कौन से वायरस, बैक्टीरिया इसके लिए जिम्मेदार हैं। न ही अभी इसकी कोई जांच हुई है। इस बीमारी में बुखार, सिरदर्द, गर्दन में अकड़न और उल्टी होती है।

कम प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों को यह बीमारी ज्यादा हो रहे हैं। बच्चों का पोषण अच्छा रखें। पर्याप्त पानी पिलाएं। डॉक्टर को दिखाने में देरी न करें।

-डॉ.राजेश टिक्कस, एसोसिएट प्रोफेसर, शिशु रोग, हमीदिया अस्पताल

Posted By: Nai Dunia News Network