वैभव श्रीधर, भोपाल। प्रदेश सरकार छह लाख 45 हजार टन गेहूं की नीलामी करने के बाद अब धान की भी नीलामी होगी। केंद्र सरकार ने वर्ष 2017-18 और 2019-20 की मिलिंग से शेष पौने चार लाख टन से अधिक धान को अब सेंट्रल पूल में लेने से इन्कार कर दिया है।

नीलामी से एक हजार 400 रुपये से लेकर आठ सौ रुपये प्रति क्विंटल तक राशि मिलने की उम्मीद है। जबकि, जुलाई 2021 तक धान का प्रति क्विंटल औसत आर्थिक लागत दो हजार 476 रुपये है। इस प्रकार सरकार को धान नीलाम करने के बाद भी करोड़ों रुपये की हानि होगी पर सरकार के पास इसके अलावा अन्य विकल्प भी नहीं है।

प्रदेश सरकार ने वर्ष 2019-20 में समर्थन मूल्य पर 25 लाख 54 हजार टन धान का उपार्जन किया था।

इसमें से 20 लाख 47 हजार टन धान की मिलिंग हुई और चावल भारतीय खाद्य निगम को सेंट्रल पूल के लिए दिया गया। तीन लाख 82 हजार टन धान की मिलिंग अब तक नहीं हो पाई है। जबकि, राज्य सरकार के अनुरोध पर केंद्र सरकार ने बार-बार मिलिंग की अवधि में वृद्धि की। 29 अप्रैल 2021 को पत्र लिखकर केंद्र सरकार ने साफ कर दिया कि अब मिलिंग की अवधि में वृद्धि नहीं होगी और शेष धान का निराकरण राज्य सरकार ही करे।

यह धान गोदाम और कैप में रखी हुई है। खाद्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एक अप्रैल 2020 से मिलिंग प्रारंभ हुई। कोरोना काल में प्रतिमाह औसतन एक लाख टन धान की मिलिंग हुई थी। गति ठीक चल रही थी पर जुलाई अंत में चावल की गुणवत्ता को लेकर बालाघाट, मंडला सहित अन्य जिलों में कार्रवाई हुई और निम्न गुणवत्ता का चावल मिलर को लौटा दिया। इससे मिलिंग लगभग बंद हो गई। मिलर ने धान की गुणवत्ता का सवाल उठाया और टेस्ट मिलिंग करके धान लेने की मांग रखी पर केंद्र सरकार ने अनुमति नहीं दी।

मिलिंग नहीं होने से सरकार ने मिल संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की और मिलों को सील तक कर दिया पर यह कदम कारगर साबित नहीं हुआ। इसी तरह वर्ष 2017-18 की एक हजार 250 टन धान मिलिंग के लिए शेष है। खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग ने मिलिंग के लिए शेष धान को अब नीलाम करने का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे अंतिम निर्णय के लिए कैबिनेट में रखा जा रहा है।

दो हजार रुपये प्रति क्विंटल तक गेहूं लेने को तैयार खरीदार

केंद्र सरकार द्वारा सेंट्रल पूल में छह लाख 45 हजार टन गेहूं लेने से इन्कार करने के बाद सरकार ने इसे नीलाम करने के लिए छोटे-छोटे समूह बनाकर निविदा बुलाई तो परिणाम बेहतर सामने आए हैं। खरीदारों ने एक हजार 600 रुपये से लेकर दो हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर प्रस्तावित की है। राज्य नागरिक आपूर्ति निगम ने गेहूं की प्रति क्विंटल आधार दर एक हजार 590 रुपये तय की थी। निगम ने परीक्षण करने के बाद दर अनुमोदित करने का प्रस्ताव मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली साधिकार समिति को भेज दिया है।

मूंग की भी होगी नीलामी

प्रदेश में चार लाख 39 हजार टन ग्रीष्मकालीन मूंग का उपार्जन समर्थन मूल्य सात हजार 196 रुपये प्रति क्विंटल पर किया है। जबकि, केंद्र सरकार ने दो लाख 47 हजार टन मूंग खरीदने की ही अनुमति दी थी। शेष मूंग को सेंट्रल पूल में लेने की मांग पिछले दिनों में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर से की है। वहीं, 80 हजार टन मूंग मध्यान्ह भोजन योजना में बच्चों को देने का प्रस्ताव है, जिस पर अंतिम निर्णय होना बाकी है।

किस दर पर बिक्री से कितना हो सकता है नुकसान

औसत दर- संभावित विक्रय दर- संभावित हानि

2,476-800-640

2,476-1,000-564

2,476-1,200-487

2,476-1,400-411

नोट- दर प्रति क्विंटल और राशि करोड़ में।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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