चारबैत में गायिकाओं ने किया इश्क-मोहब्बत के साथ शौर्य का बखान

भोपाल(नवदुनिया रिपोर्टर)। मप्र जनजातीय संग्रहालय में चल रहे गमकः रंग मध्यप्रदेश श्रृंखला के अंतर्गत बुधवार की शाम विहान संस्था की महिला गायिकाओं ने चारबैत की प्रस्तुति की। शुरुआत मुस्कुरा के किसने देखा मुझको... चिलमन के करीब..., यही दिन हैं मेहंदी लगाने काबिल... से की गई।

चारबैत शायरी की एक ऐसी शैली है, जिसमें इश्क-मोहब्बत के साथ शौर्य का बखान किया जाता है। चारबैत के अखाड़े या पार्टियां मैदान में मंच बनाकर 20-25 फीट की दूरी पर लकड़ी के तख्त पर आमने-सामने बैठकर एक दूसरे पर शायरी के माध्यम से जीतने की कोशिश करती हैं। चारबैत गायन में सवाल-जवाब होते हैं तथा यह कार्यक्रम रात में आयोजित किए जाते हैं।

गायिकाओं ने इसके बाद ये न थी हमारी किस्मत के विसाले यार होता..., हमें तो शाम-ए-दम में काटनी है जिंदगी..., आलम में तो हर सिम्त बाहर आई हुई है और न आते हमें इसमें तकरार क्या थी... आदि चारबैत प्रस्तुत किए।

इस समूह को चारबैत का प्रशिक्षण मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी ने एक कार्यशाला में दिया, उसके बाद इस समूह ने देश कई हिस्सों में इसकी प्रस्तुति दी। खुले मंच पर श्वेता केतकर, तेजस्विता अनंत, निवेदिता सोनी, सृष्टि भागवत, व्याख्या चौहान एवं ईशा गोस्वामी ने प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का सजीव प्रसारण संग्रहालय के इंटरनेट मीडिया पर भी किया गया।

गमक में आज

गुरुवार को शाम 6ः30 बजे से साहित्य अकादमी द्वारा वैशाली गुप्ता, भोपाल की रंग संगीत की प्रस्तुति होगी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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