
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। स्ट्रोक के मरीजों को इलाज के लिए दिल्ली या मुंबई जैसे बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। एम्स भोपाल ने अब मस्तिष्क की धमनियों में आई रुकावट को हटाने के लिए अत्याधुनिक ''मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी'' की सुविधा शुरू की है। एम्स के डाक्टरों का कहना है कि यदि स्ट्रोक (मस्तिष्क का दौरा) के शुरुआती घंटों में इसका इलाज शुरू कर दिया जाए तो लाखों लोगों की जिंदगी को बचाया जा सकता है। यह नई सुविधा स्ट्रोक के मरीजों को त्वरित और सटीक निदान के साथ इलाज प्रदान करने में सहायक होगी।
यह ''मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी'' एक क्रांतिकारी और न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया है। इस विधि में जांघ या कलाई की धमनी के माध्यम से एक बेहद पतली ट्यूब कैथेटर को सीधे मस्तिष्क की अवरुद्ध धमनी तक पहुंचाया जाता है। इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी विशेषज्ञ इस ट्यूब की मदद से थक्के (खून के जमाव) को बाहर निकालते हैं या हटा देते हैं, जिससे मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह तत्काल सामान्य हो जाता है। इस तकनीक के इस्तेमाल से गंभीर स्ट्रोक के मामलों में भी मरीज की स्थिति में सुधार देखा गया है।
बता दें कि एम्स भोपाल में एडवांस्ड इमेजिंग (जैसे सीटी और एमआरआई) और इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी तकनीकों को मिलाकर इस प्रक्रिया को अंजाम दिया जा रहा है। संस्थान में 24 घंटे विशेषज्ञों की टीम मौजूद रहेगी, जिसमें न्यूरोलाजिस्ट, न्यूरोसर्जन, न्यूरो रेडियोलॉजिस्ट और क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ शामिल हैं।