नीलू रंजन, भोपाल/नई दिल्ली। एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति बैक्टीरिया व वायरस में बढ़ती प्रतिरोधक क्षमता से निपटने में आयुर्वेद नया विकल्प साबित हो सकता है। अत्याधुनिक तरीके से तैयार आयुर्वेदिक एंटीबायोटिक दवाएं न सिर्फ विशिष्ट प्रकार के बैक्टीरिया से निपटने में कारगर हैं, बल्कि उनमें प्रतिरोधी क्षमता भी विकसित नहीं होने दे रहीं।

भोपाल एम्स के अध्ययन में आयुर्वेदिक एंटीबायोटिक दवा फीफाट्रोल को एक प्रमुख बैक्टीरिया संक्रमण के खिलाफ प्रभावी पाया गया है। एम्स, भोपाल ने अपने शोध में फीफाट्रोल को स्टैफिलोकोकस प्रजाति के बैक्टीरिया के खिलाफ बेहद प्रभावी पाया है। स्टैफिलोकोकस बैक्टीरिया त्वचा, सांस और पेट संबंधी संक्रमण के लिए जिम्मेदार है। इस प्रजाति के कई बैक्टीरिया सक्रिय हैं, जिनमें आरियस, एपिडर्मिस, स्पोफिटिकस शामिल हैं। फीफाट्रोल एंटीबायोटिक को इन तीनों बैक्टीरिया के खिलाफ प्रभावी रूप से कारगर पाया गया है। एक अन्य बैक्टीरिया पी रुजिनोसा के खिलाफ भी यह असरदार है।

फीफाट्रोल 13 जड़ी-बूटियों से तैयार एक एंटी माइक्रोबियल सोल्यूशन है

शोधकर्ताओं की टीम के प्रमुख और एम्स भोपाल के निदेशक डॉ. समरन सिंह के अनुसार, 'आमतौर पर आयुर्वेदिक दवाएं प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती हैं, लेकिन फीफाट्रोल के मामले में ऐसा नहीं पाया गया है। यानी बैक्टीरिया में इसके खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न होने के संकेत नहीं मिले हैं।" उन्होंने बताया कि नतीजे उत्साहजनक हैं। फीफाट्रोल 13 जड़ी-बूटियों से तैयार एक एंटी माइक्रोबियल सोल्यूशन है, जिसमें पांच बूटियों सुदर्शन वटी, संजीवनी वटी, गोदांती भस्म, त्रिभुवन कीर्ति रस तथा मृत्युंजय रस प्रमुख हैं। इसमें तुलसी, कुटकी, चिरायता, मोथा, गिलोय, दारुहल्दी, करंज तथा अपामार्ग जैसी आठ जड़ी-बूटियों के अंश भी मिलाए गए हैं।

स्थिति भयावह हो गई है

पूरी दुनिया बैक्टीरिया में एंटीबायोटिक के प्रति बढ़ती प्रतिरोधक क्षमता को लेकर चिंतित है। एंटीबायोटिक के अंधाधुंध प्रयोग के कारण स्थिति भयावह हो गई है। बैक्टीरिया की प्रतिरोधक क्षमता के कारण एंटीबायोटिक दवा बेअसर हो जाती है और इससे कई मरीजों की मौत तक हो जाती है। इस खतरे से निपटने के लिए भारत ने एंटीबायोटिक दवाओं को नई एच-1 श्रेणी में डाल दिया था। इस श्रेणी की दवाओं की स्ट्रिप (पत्ते) पर लाल लाइन और आरएक्स लिखना अनिवार्य होता है, ताकि सिर्फ डॉक्टर के लिखे जाने पर ही दुकानदार इन्हें बेचें, लेकिन कई साल बाद भी इसका कड़ाई से पालन नहीं कराया जा सका है।

जाहिर है एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोधक क्षमता से निपटने में आयुर्वेदिक एंटीबायोटिक दवा बेहतर विकल्प साबित हो सकती है और पूरी दुनिया को नई राह दिखा सकती है।

Posted By: Saurabh Mishra