धनंजय प्रताप सिंह, भोपाल। मध्य प्रदेश में संचालित निजी विश्वविद्यालयों द्वारा रेवड़ी की तरह बांटी गई डिग्रियों से बिहार, तेलंगाना सहित कई राज्यों की भर्ती एजेंसियां परेशान हैं। इनकी डिग्रियों पर बिहार तकनीकी सेवा आयोग ने सवाल भी उठाए हैं। बिहार में कनिष्ठ अभियंताओं की भर्ती प्रक्रिया के दौरान निजी विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों को दिए गए मनमाने अंकों का मामला सामने आया था। वहां के भर्ती आयोग ने बिहार सरकार के प्रधान सचिव को पत्र लिखकर इस बात की सूचना भी दी कि मध्य प्रदेश सहित कुछ राज्यों के निजी विश्वविद्यालयों की मान्यता और उनके दिए प्रमाण पत्रों की जांच कर आयोग को सूचित किया जाए। बता दें, मध्य प्रदेश में 41 निजी विश्वविद्यालय संचालित हो रहे हैं।

ये शिकायतें भी मिली कि कई निजी विश्वविद्यालय चार वर्ष के पाठ्यक्रम की डिग्री एक महीने में प्रदान कर देते हैं। इस तरह की एक शिकायत के आधार पर तेलंगाना पुलिस ने एसआरके यूनिवर्सिटी, भोपाल और स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय, सागर में छापा मारा था। इन विश्वविद्यालयों द्वारा छात्रों का पंजीयन, उनकी फीस जमा करने की तिथि की सूचना निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग को अनिवार्य रूप से दी जानी चाहिए लेकिन इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।

मध्य प्रदेश के दो निजी विश्वविद्यालयों पर शक

बिहार तकनीकी सेवा आयोग ने जिन निजी विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। इनमें से दो मध्य प्रदेश के हैं। आयोग ने कहा है कि एसआरके विश्वविद्यालय भोपाल और स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय भोपाल सहित देश के आठ निजी विश्वविद्यालयों से आवेदकों ने मनमाने अंक प्राप्त करने के फर्जी प्रमाण पत्र बनवाए और आवेदन कर दिया। बिहार तकनीकी सेवा आयोग ने उत्तर प्रदेश के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, झारखंड के साईनाथ विश्वविद्यालय, राजस्थान के ओपीजेएस विश्वविद्यालय और सिंघानिया विश्वविद्यालय, मेघालय के सीएमजे विश्वविद्यालय और विलियम कैरी विश्वविद्यालय के प्रमाण पत्रों की भी जांच करने का आग्रह किया था।

नियमों की अनदेखी

दरअसल, निजी विश्वविद्यालय में प्रवेश देने के साथ ही छात्र की डिग्री पूर्ण होने तक प्रतिवर्ष उसकी फीस जमा करवानी चाहिए। छात्रों की सूची निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग को भेजनी चाहिए। कई मामलों में देखा जा रहा है कि निजी विश्वविद्यालय एक ही तिथि में सारी फीस जमा करवाकर डिग्री बांट रहे हैं।

मूल निवासी बिहार के और डिग्री ली मध्य प्रदेश से

जिन अभ्यर्थियों के डिग्री-डिप्लोमा पर बिहार तकनीकी सेवा आयोग ने सवाल उठाए थे, वे सभी बिहार के मूल निवासी हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि सभी की डिग्रियां मध्य प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों द्वारा जारी की गई हैं। सभी को 80 प्रतिशत से ऊपर अंक दिए गए हैं।

इन विश्वविद्यालयों ने दिए 80 प्रतिशत से अधिक अंक

एसआरके विश्वविद्यालय भोपाल, एपीजे कलाम विश्वविद्यालय इंदौर, सर्वपल्ली राधाकृष्णन विश्वविद्यालय भोपाल, सर्वपल्ली राधाकृष्णन विश्वविद्यालय भोपाल, आरकेडीएफ विश्वविद्यालय, श्री सत्यसाई विश्वविद्यालय, सीहोर।

इनका कहना है

स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय के खिलाफ फर्जी डिग्री बांटने की शिकायत मिली थी, जो जांच में सही पाई गई है। दोषियों पर कार्रवाई की जा रही है।

शैलेंद्र सिंह, अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश शासन

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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