भाेेपाल। नवदुनिया स्टेट ब्यूरो। मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष का चुनाव 29 दिसंबर 2020 मंगलवार को होगा। निर्विरोध निर्वाचन न होने की सूरत में मतदान कराया जाएगा। इसमें 229 विधायक हिस्सा लेंगे। दलीय स्थिति के हिसाब से विधानसभा में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है, इसलिए अध्यक्ष भी भाजपा का ही चुना जाना तय है। निर्णय उपाध्यक्ष पद को लेकर होना है। परंपरानुसार यह पद प्रतिपक्ष के हिस्से में आता है लेकिन परिस्थितियां बदली हुई हैं और कांग्रेस सरकार के समय के अनुभव के मद्देनजर भाजपा इस पद को हाथ से जाने नहीं देना चाहेगी। 28 दिसंबर से 30 दिसंबर तक के शीतकालीन सत्र को लेकर विधानसभा सचिवालय ने शुक्रवार को अधिसूचना जारी कर दी।

विधानसभा के प्रमुख सचिव अवधेश प्रताप सिंह ने बताया कि राज्यपाल आनंदी बेन पटेल की सत्र बुलाने संबंधी अनुमति मिलने के बाद अधिसूचना जारी कर दी गई है। 28 दिसंबर को सुबह 11 बजे से सत्र की बैठक प्रारंभ होगी। तीनों दिन प्रश्नकाल सहित अन्य शासकीय कार्य होंगे। पहले दिन उपचुनाव में निर्वाचित विधायकों को विधानसभा की सदस्यता की शपथ दिलाई जाएगी।

अगले दिन मंगलवार 29 दिसंबर को अध्यक्ष का चुनाव होगा। यदि सर्वसम्मति बन जाती है तो फिर चुनाव की नौबत नहीं आएगी और सहमति नहीं बनी तो फिर मतदान के माध्यम से अध्यक्ष का चुनाव होगा। बताया जा रहा है कि यह स्थिति तभी बनेगी, जब उपाध्यक्ष पद को लेकर टकराव की स्थिति बने। दरअसल, 2019 में जब कांग्रेस सरकार थी तब अध्यक्ष पद को लेकर कांग्रेस के नर्मदा प्रसाद प्रजापति और भाजपा के विजय शाह के बीच चुनाव हुआ था।

कांग्रेस के 114 विधायक और बसपा, सपा और निर्दलीय मिलाकर बहुमत का आंकड़ा कांग्रेस के पास था, इसलिए अध्यक्ष प्रजापति चुने गए। इस चुनाव के कारण सत्ता पक्ष ने उपाध्यक्ष पद प्रतिपक्ष को देने की जगह चुनाव करवाया और उसमें कांग्रेस की हिना कांवरे चुनी गईं। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद स्थिति बदल गई है और वर्तमान में संख्या बल भाजपा के साथ है। भाजपा के विधायक 126 हैं तो सात अन्य (निर्दलीय, सपा और बसपा) का समर्थन भी उसे हासिल है।

इस प्रकार भाजपा के पास 133 विधायक हैं। जबकि, एक स्थान रिक्त होने की वजह से सदन में विधायकों की कुल संख्या 229 है और इसमें बहुमत के लिए 115 विधायक की जरूरत है। यदि सात अन्य विधायक भी कांग्रेस को समर्थन कर दें तो भी सदन में उसके पास सदस्य संख्या 103 होगी, जो बहुमत से काफी दूर है। ऐसे में चुनाव होने पर दोनों पद भाजपा को मिलना तय है।

उधर, सत्र के दौरान सरकार लव जिहाद को रोकने के लिए सख्त धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2020 लाएगी। संभावना जताई जा रही है कि इसे 30 दिसंबर को प्रस्तुत किया जाएगा। इस बीच वर्ष 2020 के लेकर विभिन्न् विभागों की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए अनुपूरक बजट अनुमान लगाया जाएगा। नगर पालिक विधि संशोधन सहित अन्य संशोधन विधेयक भी श्ाीतकालीन सत्र में प्रस्तुत किए जाएंगे।

Posted By: Ravindra Soni

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