नवीन प्रस्तावित मार्ग को मिली स्वीकृति, परियोजना पर नौ हजार 581 करोड़ रुपये होंगे खर्च

Atal Pragati Path: भोपाल (राज्य ब्यूरो)। मध्य प्रदेश की महत्वाकांक्षी अटल प्रगति पथ (चंबल एक्सप्रेस वे) परियोजना की सभी बाधाएं अब दूर हो गई हैं। इससे बीहड़ और जंगल का अधिकांश हिस्सा बाहर हो गया है। लागत भी 275 करोड़ रुपये घटकर नौ हजार 581 करोड़ रुपये हो गई है। प्रस्तावित मार्ग की लंबाई में छह किलोमीटर की कमी आई है। इस संबंध में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान छह अगस्त को केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मिले थे।

चंबल के विकास का रास्ता साफ- अब यह श्योपुर, मुरैना और भिंड के 162 की जगह यह मार्ग अब 204 गावों से होकर गुजरेगा। इसमें पहले 188 किलोमीटर बीहड़ का हिस्सा आ रहा था, जो अब घटकर मात्र 13 किलोमीटर रह गया है। वन भूमि भी 403 हेक्टेयर की जगह 12.74 हेक्टेयर प्रभावित होगी। अब निजी भूमि के अधिग्रहण पर सरकार 623 करोड़ रुपये का मुआवजा बांटेगी।

पर्यावरणीय आपत्तियां दूर- परियोजना से प्रभावित हो रहे जंगल और बीहड़ को देखते हुए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने आपत्ति लगाई थी। इसे देखते हुए एक्सप्रेस वे के पूर्व स्वीकृत मार्ग की जगह नया प्रस्ताव भेजा गया था। इसमें श्योपुर और मुरैना जिले का 226 हेक्टेयर वन क्षेत्र अब नहीं आएगा। भिंड जिले में भी 177 हेक्टेयर की जगह 12.74 वन क्षेत्र ही प्रभावित होगा। वन्य प्राणी क्षेत्र भी काफी हद तक परियोजना से बाहर हो गया है। बीहड़ का 93 प्रतिशत हिस्सा अब अटल प्रगति पथ में नहीं आएगा। हालांकि, इसके कारण अब निजी भूमि का अधिग्रहण अधिक करना होगा।

गांवों की संख्या बढ़ी- परियोजना में आने वाले गांवों की संख्या मुरैना में 62 से बढ़कर 106 हो गई है। श्योपुर जिले में 63 की जगह 58 और भिंड जिले में 37 की जगह 40 गांव परियोजना के दायरे में आएंगे। निजी भूमि अब एक हजार 337 हेक्टेयर की जगह एक हजार 977 हेक्टेयर आएगी। भूमि अधिग्रहण के लिए सरकार को 350 करोड़ रुपये की जगह 623 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे।

मिशन 2023-24 की दृष्टि से महत्वपूर्ण है परियोजना

अटल प्रगति पथ को आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने से पहले इसका काम प्रारंभ हो जाए। यही कारण है कि निजी भूमि की जगह शासकीय भूमि देने के लिए किसानों की सहमति की प्रक्रिया 15 सिंतबर 2022 तक पूरी करना प्रस्तावित किया गया है। भूमि अधिग्रहण के लिए 15 नवंबर तक आदेश जारी कर दिए जाएंगे।

इनका कहना है

परियोजना को लेकर जो आपत्तियां थीं, उन्हें दूर कर लिया गया है। केंद्र सरकार द्वारा टर्म आफ रिफरेंस (टीओआर) स्वीकृत होने से अब कोई अड़चन नहीं रह गई है। यह अब चंबल नदी से दो किलोमीटर दूर हो गया है। बीहड़ और जंगल का बड़ा हिस्सा परियोजना के बाहर हो गया है। हालांकि, निजी भूमि का अधिग्रहण अब अधिक करना होगा। भूमि अधिग्रहण के लिए 15 नवंबर 2022 तक आदेश जारी हो जाएंगे।

- नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव- लोक निर्माण विभाग विभाग।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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