पांच गुना तक जुर्माने का है प्रविधान, पर दो से तीन गुना ही लगाया

Ayushman Yojana: भोपाल (राज्य ब्यूरो)। आयुष्मान योजना के दागी अस्पतालों पर कार्रवाई में भी गड़बड़ी हुई है। दागी 121 अस्पतालों में सिर्फ तीन के विरुद्ध प्राथमिकी कराई गई। इनमें भोपाल का वैष्णव मल्टी स्पेशि‍यलिटी, गुरु आशीष और जबलपुर का सेंट्रल इंडिया किडनी अस्पातल शामिल हैं। बाकी अस्पतालों को अर्थदंड लगाकर और 15 को सिर्फ कारण बताओ नोटिस देकर ही छोड़ दिया। इसके पीछे अधिकारियों का तर्क यह था कि अगर अस्पतालों की संबद्धता खत्म करते हैं तो उपचार के लिए अस्पताल कम पड़ जाएंगे।

देशभर में आयुष्मान भारत योजना का संचालन करने वाली नेशनल हेल्थ एजेंसी ने फर्जी बिल बनाने पर इसकी राशि का पांच गुना अर्थदंड लगाने का प्रविधान किया है, लेकिन प्रदेश में निजी अस्पतालों पर दो या तीन गुना अर्थदंड ही लगाया गया। योजना की शुरुआत से यह अर्थदंड लगाया जा रहा है, पर इसके कम होने के कारण अस्पताल संचालकों में डर नहीं रहा। वह फर्जीवाड़ा करते रहे। कुछ अस्पतालों को पुलिस कार्रवाई से बचाने के लिए पैसा लेने की बात भी सामने आ रही है।

इस तरह की गड़बड़ी की

कई अस्पतालों ने बिना गंभीर बीमारी के मरीज को भर्ती किया। इसमें भी सामान्य वार्ड की जगह बिना आवश्यकता के आइसीयू में रखा। इसके बाद भी कार्रवाई के नाम पर सिर्फ संबद्धता खत्म की गई। कुछ अस्पतालों ने जिस उपचार पैकेज के लिए अस्पताल की संबद्धता नहीं थी, उसके बाद भी मरीज को भर्ती कर इलाज किया।

इस पर स्टेट हेल्थ एजेंसी ने मामूली अर्थदंड लगाकर और कारण बताओ नोटिस देकर छोड़ दिया। उदाहरण के तौर पर जबलपुर के बाम्बे अस्पताल में एक मरीज को आसीयू में भर्ती दिखाया, जबकि उसे जनरल वार्ड में रखा गया था। भोपाल के वीसीएच अस्पताल ने साधारण मरीज को भर्ती कर आइसीयू में लंबे समय तक भर्ती किया।

मेडिकल पैकेज के तहत मरीज की सर्जरी भी कर डाली, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ अस्पताल की संबद्धता खत्म की गई। इसी तरह की गड़बड़ी करने वाले कुछ अस्पतालों की संबद्धता भी नहीं खत्म की गई, बल्कि जिस पैकेज में गड़बड़ी की सिर्फ उसके तहत मरीजों के इलाज के लिए अस्पताल को अयोग्य कर दिया गया। नवदुनिया के पास वह सूची भी है, जिसमें अस्पतालों की गड़बड़ी और उन पर की गई कार्रवाई की जानकारी है।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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