शशिकांत तिवारी/सौरभ सोनी। भोपाल। मध्य प्रदेश के 120 निजी अस्पतालों में हुए करीब 200 करोड़ रुपयों के आयुष्मान योजना घोटाले में चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। आयुष्मान भारत योजना में अस्पतालों का बिल भुगतान करने में कमीशन का जमकर खेल हुआ है।

कुछ दबंग अस्पताल संचालकों को छोड़ दें तो बाकी के बिलों का भुगतान कमीशन दिए बिना नहीं होता था। यह बात खुद अस्पताल संचालक दबी जुबान से कह रहे हैं। कमीशनबाजी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भोपाल के वैष्णव मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल को फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद भी 50 लाख रुपये भुगतान करने की तैयारी थी। यह बात सार्वजनिक होने के बाद भुगतान रोक दिया गया।

इसके पहले पौने दो करोड़ रुपये इस अस्पताल को भुगतान किया जा चुका था। मरीजों को भर्ती किए बिना ही कागजों में फर्जी मरीज दिखाकर अस्पताल ने दावा राशि ली थी। इस मामले में अस्पताल संचालक विवेक परिहार जेल में हैं। कई अस्पतालों का आज भी एक से ढाई करोड़ रुपये तक बकाया है। करीब चार महीने से उन्हें भुगतान नहीं मिला है।

इंटरनेट मीडिया में कमीशन लेने का वीडियो प्रसारित

हाल ही में एक वीडियो इंटरनेट मीडिया में प्रसारित हुआ है। इसमें कथित तौर पर विमल लोवंशी नामक व्यक्ति खुद को स्टेट हेल्थ एजेंसी की तत्कालीन कार्यपालन अधिकारी सपना लोवंशी का देवर बताते हुए बिल भुगतान के लिए नौ लाख रुपये कमीशन या रिश्वत एक अस्पताल के प्रबंधक से लेते दिख रहा है। हालांकि, सपना लोवंशी का कहना है कि वह उस व्यक्ति को जानती ही नहीं हैं। बताया जा रहा है कि भुगतान के लिए पांच से 10 प्रतिशत तक कमशीन लिया जाता था।

प्रदेश के चार महानगरों में पांच लाख मरीजों के उपचार के नाम पर 541 करोड़ बिल भुगतान

मध्य प्रदेश के चार महानगरों में आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पांच लाख तीन हजार 410 मरीजों के उपचार के नाम पर निजी अस्पतालों को 541 करोड़ 28 लाख 16 हजार चार रुपये का बिल भुगतान हो गया। इनमें उपचार के बिलों में फर्जीवाड़ा करने वाले 120 अस्पताल भी शामिल हैं। राज्य शासन इसकी पिछले एक साल से पड़ताड़ करा रहा है, लेकिन प्रदेश के केवल एकमात्र भोपाल के वैष्णव मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल के विरुद्ध एफआइआर दर्ज कर खानापूर्ति कर ली गई। शेष 129 अस्पताल शासन की कार्रवाई से अब भी बचे हुए हैं।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2020-21 में इंदौर में 47 हजार 707 मरीजों के उपचार का 133 करोड़ 13 लाख 51 हजार 217 रुपये बिल भुगतान हुआ है। इसी तरह भोपाल में एक लाख 35 हजार 567 मरीजों के उपचार का 282 करोड़ 87 हजार 210 रुपये, ग्वालियर में 69 हजार 646 मरीजों के उपचार का 60 करोड़ नौ लाख 75 हजार 267 रुपये और जबलपुर में 46 हजार 492 मरीज के उपचार पर 66 करोड़ चार लाख दो हजार 310 रुपये बिल भुगतान किया।

कोरोना के दो साल में चार महानगरों में मरीज और बिल भुगतान

शहर अस्पताल- मरीज बिल भुगतान

इंदौर- 83- 47,707- 133,13,51,217 रुपये

भोपाल- 97- 1,35,567- 282,0087,210 रुपये

ग्वालियर- 46- 69,646- 60,09,75,267 रुपये

जबलपुर- 48- 46,492- 66,04,02,310 रुपये

इनका कहना है

किसी भी अस्पताल का लंबे समय तक भुगतान नहीं रोका जाता है। इलाज संबंधी दस्तावेजों की जांच के बाद ही बिल का भुगतान किया जाता है। इसमें समय लगता है।

डा.प्रभुराम चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री मप्र।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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