भोपाल। प्रदेश की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल की सांसें थमने के बाद एक युग का अंत हो गया। बुधवार सुबह हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया। चंद मिनटों में गौर के निधन की सूचना से प्रदेश शोक की लहर में डूब गया। गौर को सांस लेने में दिक्कत के चलते 15 दिन पूर्व नर्मदा अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

अस्पताल से गौर का पार्थिव शरीर 74 बंगला स्थित उनके निवास पर ले जाया गया। अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव शरीर पहले गौर के बंगले पर रखा गया। बाद में यहां से भाजपा प्रदेश कार्यालय लाया गया। गौर के प्रति सम्मान व समर्पण का भाव तब देखने को मिला जब राजनीति से अनजान लोगों के भी आंसू निकल आए। भाजपा कार्यालय से करीब डेढ़ बजे सुभाष नगर विश्राम घाट के लिए अंतिम यात्रा रवाना हुई। अंतिम यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए।

बेटी के इलाज का खर्च उठाया

अवधपुरी में पान की दुकान चलाने वाले अमित चौकसे ने बताया कि माली हालत होने के कारण उनकी बेटी का इलाज नहीं करा पा रहे थे। मामला वर्ष 2015 का है। तत्कालीन विधायक होने के नाते उन्होंने गौर से मुलाकत की। तब गौर ने बेटी के इलाज का पूरा खर्च उठाया। वह बेटी के साथ अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे थे।

बाबूजी को बुलाएं और न आएं ऐसा संभव नहीं था

इंद्रपुरी निवासी मुकेश सेन ने बताया कि बाबूजी लोगों की हैसियत के अनुसार नहीं मिला-जुला करते थे। वर्ष 2012 में मुकेश की नास्ते की छोटी सी दुकान पर उन्होंने चाय पी थी। इसके चार साल बाद 2016 में मुकेश ने गृहप्रवेश के लिए गौर को आमंत्रण दिया तो बाबूजी पहुंच गए। मुकेश बताते हैं जानकारी मिलने पर ही बाबूजी का किसी भी कार्यक्रम में पहुंचना स्वभाव था।

सभी को देते थे तवज्जो

गौर बड़े से ज्यादा छोटे कार्यकर्ताओं की सुनते थे। भाजपा पार्षद केवल मिश्रा बताते हैं कि बाबूजी जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं की सबसे ज्यादा सुनते थे। अपने ही समर्थकों को डांटफटकार लगाने में भी गौर कभी पीछे नहीं रहे, लेकिन कोई कार्यकर्ता उनसे नाराज नहीं हुआ।