भोपाल। कमजोर मानसून की आहट ने किसानों के साथ सरकार को चिंता में डाल दिया है। आपात स्थिति से निपटने कृषि विभाग तैयारियों में जुट गया है। तय हुआ है कि मानसून तय समय से नहीं आता है तो धान की बुवाई को घटवाया जाएगा। किसानों को समझाइश दी जाएगी कि वे कम अवधि और पानी वाली फसलों (सोयाबीन, मक्का, ज्वार, बाजरा आदि) की बुवाई करें। इसकी जानकारी कृषि महोत्सव में भी दी जाएगी।

कम बारिश के मद्देनजर सरकार ने कृषि जलवायु (मालवा, निमाड़, झाबुआ, बुंदेलखंड व सतपुड़ा के पठार, नर्मदा घाटी, विंध्य व कैमूर का पठार) के हिसाब से आकस्मिक कार्ययोजना तैयार की है। इसमें मानसून के समय से पहले आने, 30 जून, 15 जुलाई और 30 जुलाई को आने की स्थिति में बोई जाने वाली फसलों की रूपरेखा तैयार की गई है। मानसून ब्रेक या फिर इसके जल्दी चले जाने की सूरत में उठाए जाने वाले कदम भी तय किए गए हैं।

विभाग के प्रमुख सचिव डॉ.राजेश कुमार राजौरा ने बताया कि बोवनी के बाद 2-4 सप्ताह बाद सूखे की स्थिति बनती है तो नमी बनाए रखने पलवार यानी घास-फूस और पत्ते को गलाकर फसल के बीच में बिछा दिया जाए। डीएपी, यूरिया और पोटेशियम क्लोराइड के पांच प्रतिशत घोल का छिड़काव किया जाए। सिंचाई फसल की जरूरत के मुताबिक की जाए। जल स्रोतों की साफ-सफाई करके भंडारण की व्यवस्था बनाएं।


रिज-फेरो पद्धति से करें बोवनी: किसानों को धान या सोयाबीन की बोवनी रिज एण्ड फेरो पद्धति से करनी की सलाह दी जा रही है। इसमें क्यारी बनाकर बोवनी की जाती है। इससे पौधों में नमी ज्यादा देर तक बनी रहती है।

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