- हमीदिया महाविद्यालय में राजनीति विज्ञान विभाग की ओर से व्याख्यान

भोपाल। नवदुनिया रिपोर्टर

छात्रों को सीखने के अवसर हमेशा उपलब्ध रहते हैं। शास्त्र और विद्याएं अनंत हैं,अभी बहुत कुछ जानना बाकी है। 64 कलाएं इस बात का प्रमाण हैं कि प्रत्येक कला की अपनी विशेषता है। विश्वविद्यालय के अध्ययन के दौरान छात्रों को हमेशा मुस्कुराते रहना चाहिए, इस दौरान मस्तिष्क में ताला लगाकर हृदय के दरवाजे खुले रखे। यह कहना है महात्मा गांधी केंद्रीय विवि मोतिहारी,बिहार के कुलपति प्रो.संजीव कुमार शर्मा का। वे शुक्रवार को शासकीय हमीदिया कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग की ओर से हुए व्याख्यान में बतौर मुख्य अतिथि विचार व्यक्त कर रहे थे। 'भारत की ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक वैविध्य विषय' पर उन्होंने कहा कि परंपरा कहती है कि अंतःकरण की सुनें और सच बोलें। भारत की विविधता के उत्सव को मनाते हुए वैविध्यता को बचाएं रखना आज की चुनौती है। अपने निंदकों का सम्मान कीजिए,उनसे भागिए मत। दूसरों की प्रशंसा कीजिए, प्रसन्नता के लिए निश्चल मन के साथ साहस चाहिए। निर्भीकता के साथ बात रखना सदैव से ही भारतीय ज्ञान परंपरा का हिस्सा रहा है। आज विचारों के मतभेद से विरोध होना तर्कसंगत नहीं है।

कर्त्तव्यों को भी अधिकारों के समतुल्य माना

इस मौके पर विशिष्ट अतिथि के रूप में रतनचंद कॉलेज दुर्ग के प्रिंसिपल डॉ. डीएन सूर्यवंशी ने 'मौलिक अधिकार और कर्तव्य' पर कहा कि जिन देशों ने कर्त्तव्यों को भी अधिकारों के समतुल्य माना,वह देश आज प्रगति के पथ पर अग्रसर है। समाज अधिकारों को स्वतंत्रता ना समझें, हमारे मौलिक कर्तव्य हमारे मौलिक अधिकारों को गति देते हैं। विषय की जानकारी के बिना विरोध करना राष्ट्रहित में नहीं है। किसी को भी विरोध और समर्थन जानकर करना चाहिए। कार्यक्रम में डॉ.गरिमा उपाध्याय,डॉ.शांति श्रीवास्तव,डॉ.भावना भदौरिया डॉ.सुष्मिता मिश्रा,डॉ.वर्षा सागोरकर,शुभम चौहान, आशुतोष मालवीय, सूर्यकांत चतुर्वेदी सहित प्राध्यापक एवं छात्र उपस्थित रहे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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