बृजेंद्र वर्मा, भोपाल। थ्री इडियट्स के बाबा रणछोरदास का फार्मूला 'काबिल बनो, कामयाबी झक मारकर पीछे आएगी'। भेल भोपाल के सेवानिवृत्त उप प्रबंधक बनवारी लाल चौकसे 2005 में साबित कर चुके थे। महज 10वीं पास, ठेठ ग्रामीण, आर्टीजन ग्रेड-4 से नौकरी शुरू करने वाला इस व्यक्ति ने अपनी काबलियत से न सिर्फ सभी को कायल बनाया बल्कि पूर्व राष्ट्रपति स्व. एपीजे अब्दुल कलाम के हाथों पद्मश्री अलंकरण भी प्राप्त किया। पर आज उन्हें अफसोस है कि रिटायर होने के बाद भेल ने तो उनके अनुभव का लाभ लेना जरूरी समझा नहीं और सरकार के स्तर पर भी कोई पहल नहीं हुई। नतीजा यह है कि पद्मश्री बनवारी लाल आज अपने ही घर भोपाल में गुमनामी का पर्याय बनकर रह गए हैं। भेल के क्वालिटी विभाग से साल 2016 में उप प्रबंधक पद से सेवानिवृत हुए चौकसे ने कई स्वदेशी उपकरण तैयार कर विदेशों पर देश की निर्भरता को खत्म किया।

अपने इसी काम के बूते विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्र में असाधारण उपलब्ध्यिों, अनुसंधान व विकास के लिए वे पद्मश्री पाने वाले देश के पहले टेक्निशियन रहे। सेवानिवृत होने के बाद एक से डेढ़ साल तक ही भेल प्रबंधन ने कार्यशालाओं में नई पीढ़ी के टेक्निशियन को प्रशिक्षण देने बुलाया। राज्य व केंद्र सरकार की ओर से भी ऐसा कोई प्लेटफार्म तैयार नहीं किया गया कि पद्मश्री चौकसे स्वयं अनुसंधान करें और नई पीढ़ी के टेक्निशियों को प्रशिक्षित करें।

इंजीनियर की डिग्री नहीं, सिर्फ दसवीं पास बनवारी लाल चौकसे का जन्म भोपाल के पिपलिया गांव में सन1956 में हुआ। गुनगा हाई स्कूल से दसवीं की परीक्षा पास कर भेल भोपाल में तीन साल का टेक्निशियन का प्रशिक्षण प्राप्त किया। निजी कंपनियों में भी काम किया। इसके बाद 1980 में लेथ मशीन टर्नर ट्रेड ऑपरेटर (आर्टीजन ग्रेड-4)के पद पर भेल में नौकरी शुरू की। 1982 में भेल में क्वालिटी सर्कल गतिविधियां शुरू हुईं। इसमें उपकरण बनाने के कार्य क्षेत्र में आने वाली खामियों को दूर किया।

मिला था राजनीति में आने का न्यौता

चौकसे बताते हैं कि पद्मश्री मिलने के बाद तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने दिल्ली बुलाया और राजनीति में आने आमंत्रित किया। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने भी भाजपा से जुड़ने के लिए कहा पर भेल की नौकरी छोड़कर उस समय राजनीति में आने से मना कर दिया।

एक नजर में पुरस्कार

- 2005 में पद्मश्री पुरस्कार।

- 1998 में प्रधानमंत्री श्रम भूषण।

- 1985 से 2001 तक पांच विश्वकर्मा पुरस्कार श्रम मंत्रालय भारत सरकार द्वारा दिए गए।

- 1996 में बेस्ट सजेस्टर ऑफ द ईयर।

- 1994 केश युअर आइडिया अवार्ड।

Posted By: Prashant Pandey

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