भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। पुरानी पेंशन बहाली के लिए मप्र में शुरू हुई कर्मचारियों की लड़ाई राजस्थान व छत्तीसगढ़ तक पहुंच गई है। वहां भी कर्मचारी संगठनों को एकजुट किया जा रहा है। दोनों राज्यों में कर्मचारियों को जिम्मेदारियां दी जा रही हैं। कोरोना संक्रमण के बाद इन राज्यों में कर्मचारी सड़क पर विरोध दर्ज कराएंगे। इसकी तैयारी चल रही है। मप्र में पहले से विरोध-प्रदर्शन किए जा रहे हैं, लेकिन पुरानी पेंशन बहाली के पक्ष में शासन स्तर पर कुछ नहीं हुआ है। प्रदेश में 2018 से पुरानी पेंशन बहाली की मांग की जा रही है।

बता दें कि केंद्र में जनवरी 2004 से पुरानी पेंशन बंद की गई थी। एक साल बाद जनवरी 2005 से मप्र में भी पेंशन बंद कर दी गई। इस वजह से अब तक 5 लाख 4 हजार कर्मचारी नई पेंशन के दायरे में आ गए हैं। इस पेंशन के फायदे कम नुकसान अधिक हैं, इसलिए पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग को लेकर अधिकारियों-कर्मचारियों ने मिलकर प्रदेश में अधिकारी-कर्मचारी कल्याण संघ बनाया है, जिसके अध्यक्ष जितेंद्र सिंह हैं।

वहीं, छत्तीसगढ़ में अतुल पांडे व राजस्थान में विद्याधर दासोरा संघ का कामकाज देख रहे हैं। बाकी के राज्यों में भी पुरानी पेंशन की मांग के लिए कर्मचारी-अधिकारी एकजुट हो रहे हैं। संघ के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह बताते हैं कि नई पेंशन से कर्मचारी नाखुश हैं। सेवा के दौरान और सेवा के बाद भविष्य सुरक्षित नहीं है।

नई पेंशन के लिए काटी जाने वाली राशि को बाजार से जोड़ दिया है। सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन की स्थाई पात्रता नहीं है। इस वजह से पूरी उम्र विभागों में काम करने के बाद सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारी, कर्मचारी नाखुश रहते हैं। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए पुरानी पेंशन बहाली को लेकर राष्ट्रव्यापी एकजुटता बना रहे हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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