CM Rise School Bhopal भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। जब सीएम राइज़ स्कूल की परिकल्पना हुई तब मुख्यमंत्री ने हमें निर्देश दिए कि प्रदेश में ऐसे स्कूल बनाए जाए जिसमें हर कोई अपने बच्चे को पढ़ाना चाहे। उनका ध्येय है कि ग्रामीण व जनजातीय बच्चों को भी समान रूप से ऐसी शिक्षा और सुविधाएं मिल सकें, जैसे शहरों के बड़े-बड़े स्कूलों में होती है। जनजातीय कार्य विभाग का लक्ष्य है कि हमारे हर सीएम राइज़ स्कूल की अपनी एक कला, पहचान, शोभा और साख बनें। वहां बच्चे पढ़कर एक सफल नागरिक बन पाएं।

यह बात जनजातीय कार्य विभाग की प्रमुख सचिव डा. पल्लवी जैन गोविल ने जनजातीय कार्य विभाग द्वारा प्रशासन अकादमी में आदिवासी कलाकारों के लिए आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला के दौरान कही। कार्यशाला में विभिन्न सीएम राइज़ स्कूलों के जिलों से स्थानीय गोंड, बैगा व भील जनजाति के कलाकारों को आमंत्रित किया गया। इस कार्यशाला में भवन निर्माण से जुड़े प्रशासनिक अधिकारी, वास्तुविद्, कला विशेषज्ञ और शिक्षक भी शामिल हुए। इसमें सीएम राइज़ स्कूलों के जनजातीय कला आधारित सौन्दर्यीकरण पर चर्चा व मंथन हुआ।

वर्कशाप में प्रदेश भर के विभिन्न जिलों के जिला आयुक्त व प्राचार्य भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। कार्यशाला में वास्तुविदों ने जनजातीय कला पर केंद्रित विभिन्न कांसेप्ट प्लान प्रस्तुत किए। वास्तुविदों और कलाकारों ने कलात्मक पहलुओं पर विस्तृत चर्चा के बाद प्रजेंटेशन दिया और डिजाइंस तय किए, ताकि स्कूलों में जनजातीय कला की उत्कृष्ट व अनोखी झलक दिख सके।

देश के लिए मिसाल साबित होंगे सीएम राइज़ स्कूल

जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त संजीव सिंह ने कहा कि जनजातीय कला व संस्कृति को संवारते-संजोते हुए इसका प्रचार करना भी बेहद जरूरी है। इन स्कूलों में कलात्मक कार्य कर जनजातीय कलाकार अपनी कला को प्रदर्शित कर सकेंगे। व्यक्तिगत तौर पर एक कलाकार को मजबूती देगा कि वह अपनी कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित कर सकें। इससे उसकी आय के स्त्रोत भी बढ़ सकेंगे। सीएम राइज़ स्कूलों में शामिल की गई जनजातीय कला देश में एक अनुपम उदाहरण व मिसाल साबित होगा।

उप-सचिव मीनाक्षी सिंह ने कहा कि सीएम राइज़ स्कूल जनजातीय कलाकारों के लिए व्यापक मंच साबित होंगे। इससे कलाकारों को पहचान और आर्थिक प्रोत्साहन भी मिलेगा। भविष्य में हमारे सीएम राइज़ स्कूलों के भवनों में जनजातीय कला किस रूप में दिखेगी, इसकी भूमिका इस कार्यशाला रखी गई है।

Posted By: Lalit Katariya

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