- भारत भवन में दिनमान समारोह शुरू, पहले दिन हुईं गायन-वादन की सभाएं

भोपाल। नवदुनिया रिपोर्टर

भारत भवन में युवा रचनाकारों की रचनाशीलता पर केंद्रित बहुकला समारोह 'दिनमान' की पहली सभा सजी। युवाओं की प्रतिभा को मंच देते इस समारोह में कला रसिकों को सभाओं में अलग-अलग रागों को सुनने और उनकी विशेषताओं को जानने-समझने का अवसर मिला। शुरुआत महिला कलाकारों की कलाकृतियों की प्रदर्शनी के साथ हुई। इसके बाद युवा गायक निखिल रमेश बाकरे का गायन हुआ। इस कड़ी में देवव्रत मिश्र और गीता नावाले की सुरबहार व सरस्वती वीणा की जुगबंदी हुई। अंतिम सभा के रूप में रामेंद्र सिंह सोलंकी, झानेश्वर देशमुख और केपी अर्जुन सुंदरम की तबला, पखावज और मृदंगम की तिगलबंदी हुई। कार्यक्रम का संचालन कला समीक्षक विनय उपाध्याय ने अपने चिरपरिचित अंदाज में किया।

दक्षिण और पूर्व की दो शैलियों का मिलन

समारोह में सबसे खास प्रस्तुति देवव्रत मिश्र अैर गीता नावाले की रही, जिसमें सरस्वती वीणा के साथ सुरबहार जैसे दुर्लभ व प्राचीन वाद्यों को सुनना संगीत की दो शैलियों के मिलान जैसा अनुभव रहा। गीता नावाले सरस्वती वीणा के साथ दक्षिण से आईं, वहीं देवव्रत मिश्र पूर्व से सुरबहार लेकर आए। यहां दक्षिण के साथ पूर्व की सुरीली आपसदारी में दो समय और संस्कृति का प्राकट्य हुआ। इस मौके पर उन्होंने शुरुआत राग हंसध्वनि से किया। बहुचर्चित राग हंसध्वनि मीठा और चंचल प्रवृत्ति का है। इसका चयन दोनों साजों के अनुकूल रहा। प्रस्तुति में उन्होंने राग को विस्तार देते हुए छोटे आलाप के साथ चार ताल की बंदिश पेश की। समापन के लिए उन्होंने राग चारूकेशी का चयन किया, जिसमें आदिताल की बंदिश सुनाई।

पिता को समर्पित की प्रस्तुति

इसके पूर्व समारोह की शुरुआत करते हुए युवा गायक निखिल रमेश बाकरे का गायन हुआ। निखिल ने अपनी प्रस्तुति के लिए राग मारवा के चयन किया। यह राग श्रृंगार परक है, गहरे भाव की अभिव्यक्ति इस राग के जरिए की जा सकती है। उन्होंने इस राग में विलंबित एक ताल में 'कैसे होरी खेलत नंद लाल ' बंदिश सुनाई। इसके बाद मध्य तीन ताल में 'मारू कवन के तुम...'की रही। वहीं अंतिम प्रस्तुति उन्होंने अपने पिता स्व. रमेश बाकरे को समर्पित की, जिसके बोल 'हे री सखी आज हमें...' थे। यह दादरा ताल में निबद्ध रही। प्रस्तुति में निखिल के साथ तबले पर मनोज पाटीदार, हारमोनियम पर अमन मलक और तानपुरे व सहगायन में अनुषा शर्मा ने संगत दी।

भक्तिपरक लेकिन रोमांचकारी अनुभव

समारोह की में ताल वाद्य आधारित तिगलबंदी से पहले दिन की सभा को विराम दिया। इसमें तबले पर रामेंद्र सिंह, पखावज पर ज्ञानेश्वर देशमुख और मृदंगम पर केपी अर्जुन सुंदरम की तिगलबंदी हुई। एक दूसरे से सांगीतिक सवाल जवाब करते हुए कलाकारों ने समां बांधा। प्रस्तुति में तीन ताल में आमद, तोड़े, उठान और बहुत सुंदर तिहाई का मेल दिखाई दिया। वहीं महाकाल वंदना ने श्रोताओं में भक्तिपरक, लेकिन रोमांचकारी भाव भर गया। भारतीय ताल वाद्यों का सुंदर संयोग इस समारोह की पहली शाम को यादगार बना गया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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