आनंद दुबे, भोपाल। हाल ही में विभिन्न थाना प्रभारियों के तबादले के बीच नए शहर के एक थाने के टाआइ की कुर्सी खाली रह गई थी। हालांकि, यहां से हटाए गए दारोगाजी को एक वीवीआइपी इलाके के थाने की कमान सौंप दी गई थी। उधर खाली पड़ी कुर्सी को आनन फानन रात 12 बजे भर दिया गया। यहां की कमान पुराने शहर के एक थाने में काफी समय से जमे टीआइ साहब को सौंपी गई। उधर, उनके स्थान पर पड़ोस के थानेदार को भेज दिया गया। यहां तक तो सब कुछ ठीक था, लेकिन पड़ोस के थाने से पहुंचे साहब ने पहला मुकदमा क्षेत्र के एक वजनदार नेता के खिलाफ दर्ज कर दिया। इसके बाद सियासत गर्मा गई है। नेता के पक्ष में उनकी पार्टी ने मामले को राजनीतिक द्वेषता बताते हुए ऊपर तक शिकायत भेज दी है। चर्चा यह भी है कि अंधेरे में तबादला किया ही इसके लिए था।

सब्र के फल में थाना मिला

लंबे इंतजार के बाद आखिरकार थानों में फेरबदल की सूची जारी हो गई। आधा दर्जन से ज्यादा इंस्पेक्टरों को इधर से उधर कर दिया गया। इसमें उन साहब को भी लंबे इंतजार के बाद थाना नसीब हो गया है, जो राजधानी में पहली बार थाना प्रभारी बनने के लिए काफी समय से लगे हुए थे। उनको एक ऐसे थाने की जिम्मेदारी मिली है, जहां जरा सी नजर चूकने पर नीचे का स्टाफ खेल कर देता है। साथ ही पूरा ठीकरा थाना प्रभारी पर फूटता है। पिछले साल भी इस थाने में थाना प्रभारियों का आना-जाना लगा रहा था। यहां कोई भी टीआइ नहीं टिक पाया। ऐसे में इन साहब को अपने कान तो खुले रखना ही होंगे, साथ ही अपना नेटवर्क भी तैयार करना पड़ेगा। अंदर की बात यह भी है कि साहब को कुर्सी दिलाने के लिए उनके इलाके के एक वरिष्ठ जनप्रतिनिधि ने सीधे बड़े साहब से बातचीत की थी।

साहब के तेवर देख सहमा थाना

नए शहर के एक थाने में उस वक्त सन्न्ाटा खिंच गया, जब पुलिस महानिदेशक रैंक के एक अफसर वहां तमतमाते हुए दाखिल हुए। साहब के तेवर देख थाना प्रभारी ने चुपचाप वहां से निकलने में भलाई समझी। इलाके में जाने के बहाने से थाने से निकल गए। साहब ने अपना परिचय देते हुए ड्यूटी अधिकारी से थाने में हुई एक एफआइआर के बारे में सवाल किया। वक्त की नजाकत और पूरा मामला समझने के बाद थाने में पहले के स में फरियादी बने दो लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज की। उसके बाद साहब वहां से रवाना हुए। यह शहर का वह थाना है, जिसमें थाने की कुर्सी संभालने से अक्सर थाना प्रभारी ना नुकर करते हैं। झोपड़ पटि्टयों के बाहुल्य वाले इस थाने में आदतन अपराधियों की भरमार है। पुलिस जरा भी सख्ती दिखाती है, तो नेतानगरी के सिफारिशी फोन मामले को रफा-दफा करने के लिए आने लगते हैं।

थाना बदला, मुसीबत नहीं

चुनावी दौर में बदलाव की बयार ने पुराने शहर के एक थाने में जमे टीआइ साहब को नए शहर के एक थाने की कुर्सी थमा दी गई। वह हाल ही में उनके इलाके के बड़े अस्पताल नर्सिंग स्टाफ के साथ छेड़छाड़ की शिकायत को लेकर काफी तनाव में थे। हालांकि, इसके पहले वह इस अस्पताल में हुए बड़े बड़े मामलों को खुद पर आंच आए बिना सुलझाने में सफल भी हो गए थे, लेकिन इस बार मामला काफी ऊपर तक गर्माने के कारण वह खुद को असहज महसूस कर रहे थे। जिसके चलते बदलाव से उन्हें कुछ राहत महसूस हुई, लेकिन थाने की कुर्सी संभालते ही अपशगुन ने उनका मन खट्टा कर दिया। दरअसल कुर्सी पर बैठते ही इलाके में बदमाशों ने नकदी और बाइक की लूट कर दी। परेशान होकर साहब अब इस तरह की मसुीबतों से छुटकारा पाने के लिए पंडितों से उपाय पूछ रहे हैं।

Posted By: Ravindra Soni

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