अंजली राय, भोपाल। स्कूल शिक्षा विभाग के एक कार्यालय से फाइलें भी आहत हो गई हैं। यहां राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान की जिम्मेदारी अपर संचालक तोमरजी को दी गई है, जबकि एक मैडम पहले से ही इस काम को देख रही हैं। अब तोमरजी के आने के बाद मैडम ने न तो उन्हें केबिन दिया और न ही काम। हालांकि, तोमरजी ने उस केबिन में अपना टेबल लगा लिया है। अब कर्मचारी कोई फाइल लेकर केबिन में आता है तो वह मैडम की ओर ही बढ़ जाता है। इस बीच तोमरजी की आंखें फाइलों को ऐसे देखती हैं, जैसे दोनों एक-दूसरे से बात कर रहे हों। इस दृश्य को देखकर तो ऐसा ही लगता है कि अगर फाइलों में जुबान होती तो वह बोल देती... साहब मैं आपके टेबल पर ही आऊंगी। पर, शायद दोनों को एक-दूसरे की किस्मत पर भरोसा है, इसलिए फाइल चुपचाप मैडम के टेबल पर बैठ जाती है।

सपनों वाली आंखें

आंखें तो देखने के लिए होती हैं, लेकिन कुछ लोग सपने देखते हैं और कुछ की आंखें ही सपनों वाली होती हैं। कुछ ऐसा ही हुआ है राजधानी के एक स्वायत्तशासी कन्या कालेज की प्राचार्य महोदया के साथ। कुछ साल पहले जब ये सहायक प्राध्यापक थीं तो प्राचार्य बनने का सपना देखती थीं। तब इन्हें राजनीतिक रिश्तेदारी का फायदा मिला और मैडम प्राचार्य की कुर्सी पर बैठ गईं। अब कार्यकाल खत्म हो रहा है तो आंखों में और भी सपने तैरने लगे हैं। अब सपना है बरकतउल्ला विवि में कुलपति बनने का...। अब किस्मत फिर साथ देने पर मेहरबान है। विवि के कुलपति का कार्यकाल भी समाप्त होने को है। ऐसे में अगर फिर राजनीतिक रिश्तेदारी का फायदा मिल जाए तो इस तैरते सपने को मुकाम मिल जाएगा। हालांकि, ऐसा नहीं है कि मैडम मेहनत नहीं कर रही हैं। अपनी खूबियों की फाइल तैयार कर राजभवन के कई चक्कर भी लगा चुकी हैं।

बारिश में धुल गए अरमान

गर्मी की छुट्टी के बाद स्कूल तो खुले, लेकिन पढ़ाई नहीं योगाभ्यास ही कराया गया। कारण था स्कूल शिक्षा विभाग का आदेश, जिसमें कहा गया था कि सभी स्कूलों को योग दिवस पर 300 बच्चों को लाल परेड मैदान भेजना है, जहां वे मुख्यमंत्री के साथ योग करेंगे। इस आदेश के बाद स्कूलों में बेहतर प्रदर्शन की ललक भी जाग गई थी। सभी ने धूप में भी खूब मेहनत की। योग दिवस से एक दिन पहले तक बच्चे और शिक्षक मैदान में पसीना बहाते रहे, लेकिन उसी दिन हुई वर्षा ने सभी के अरमानों पर पानी फेर दिया। रात में ही प्राचार्यों को सूचना दे दी गई थी कि आप अपने स्कूलों में ही योग का कार्यक्रम करा लें। हालांकि, इस सूचना के बाद शिक्षकों के साथ बच्चों में भी मायूसी छा गई थी। सिर्फ दो स्कूल के बच्चों को ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ योग करने का मौका मिल पाया।

आखिर बाहर निकल ही गई प्रतिभा

हाल ही में मिंटो हाल में स्कूल शिक्षा विभाग का एक बड़ा कार्यक्रम हुआ। राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वे में मप्र के 17वें से 5वें स्थान पर आने पर कार्यक्रम रखा गया था। सब कुछ तय हो गया था, लेकिन विभाग के पास मंच संचालन को लेकर बड़ी दुविधा थी। दरअसल इससे पहले जो भी कार्यक्रम हुआ करता था, तब एक आइएएस मैडम मंच संचालन की जिम्मेदारी संभाल लेती थीं, लेकिन अब उनका तबादला हो चुका है। ऐसे में विभाग की नजर संचालक महोदय पर गई। पहले तो उन्होंने ना-नुकुर किया, लेकिन बाद में तैयार हो गए। अच्छी तैयारी से मंच पर पहुंचे संचालक महोदय ने ऐसा प्रदर्शन किया कि लोग गदगद हो गए। अब इधर, विभागीय अधिकारी भी खुश हैं कि चलो एक प्रतिभाशाली व्यक्ति मिल गया। उधर, संचालक महोदय भी खुश हैं कि देर से ही सही, लेकिन अपनी प्रतिभा का जलवा बिखेर ही दिया।

Posted By: Ravindra Soni

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