Bhopal Arts And Culture News: भोपाल (नवदुनिया रिपोर्टर)। गमक श्रृंखला में मंगलवार शाम जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी की ओर से संतोष तिवारी, वंदना तिवारी, नेहा गौतम, तनिष्का शांडिल्य व साथियों द्वारा 'बघेली स्वराज गायन" एवं रितेश चौरसिया और साथी, सागर द्वारा 'बुंदेली नृत्य" की प्रस्तुति हुई।

कार्यक्रम की शुरुआत संतोष, वंदना तिवारी और साथियों द्वारा बघेली स्वराज गायन से हुई जिसमें- एजी गांधी चले हैं गैल गांव..., अरे होई गा सर-सर अत्याचार..., देसुआ मां अर्जी आजादी हो..., चरखा के टूटे न तार..., अंग्रेजों के राज मां ...., भारत की धरती मैया रे सोने की चिरैया..., सउहैं विपदा परी हबे गुलामी... एवं भरात की अजब बहार... आदि स्वराज गीतों का गायन किया। गीतकार उमेश मिश्र रहे एवं सिंथेसाइजर पर संतोष तिवारी और ऑक्टोपैड पर यश गुप्ता ने संगत दी।

पर्व के मौके पर होते हैं बरेदी व जवारा लोकनृत्‍य : दूसरी प्रस्तुति रितेश चौरसिया और साथियों द्वारा बुंदेली लोकनृत्य बरेदी और जवारा की दी गई। बरेदी नृत्य- बुंदेलखंड अंचल का एक प्रचलित नृत्य है। यह नृत्य अहीर समुदाय के लोगों द्वारा किया जाता है। बरेदी नृत्य में नर्तक भगवान श्रीकृष्ण की बाल्य अवस्था से लेकर युवा अवस्था तक की लीलाओं को प्रस्तुत करते हैं। यह नृत्य दीपावली के दूसरे दिन से आरंभ कर पूर्णिमा तक किया जाता है। वहीं जवारा लोकनृत्य एक अनुष्ठानिक लोकनृत्य है जो की नवरात्र की नवमी के दिन जवारे विसर्जन के समय किया जाता है। इस नृत्य में महिलाएं एवं पुरुष दोनों की ही भागीदारी रहती है। महिलाएं सर पर जवारे के पात्र को रखकर नृत्य करती हैं। यह नृत्य माता के दिवाले से प्रारंभ होकर खेरमाता की मढ़िया तक चलता है। इसके बाद जवारे विसर्जित किए जाते हैं। इस नृत्य में मृदंग, नगड़िया, लोटा, ढोलक आदि लोकवाद्यों का उपयोग किया जाता है।

गमक में आज : बुधवार को शाम सात बजे उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी की ओर से मंदिरा हलवे और साथी, भोपाल द्वारा गायन एवं सुश्री सृष्टि गुप्ता और साथी, भोपाल द्वारा कथक नृत्य की प्रस्तुति का प्रसारण संस्‍कृति विभाग के यूट्यूब चैनल और फेसबुक पेज पर लाइव किया जाएगा

Posted By: Ravindra Soni

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