भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिनिधि)। प्रभुजी तुम चंदन हम पानी..., अब कैसे छूटे राम नाम रट लागी..., भज ले हरि-हरि रट ले हरि-हरि, मैं का जानूं देवा का जानूं...जैसे रैदास के पदों से भारत भवन का परिसर गूंज उठा। मौका था भजन गायक भारती बंधु की प्रस्तुति का। उनके साथ चार शिष्यों ने करीब एक घंटे की प्रस्तुति दी। भक्ति मार्ग के कालजयी संतकवि रविदास के जीवन चरित पर केंद्रित तीन दिवसीय संत रविदास (रैदास) समारोह का शुभारंभ शुक्रवार शाम भक्ति संगीत के साथ हुआ। इस मौके पर सबसे पहले रामानंद सिंह संगीत महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने कपिल शर्मा के निर्देशन में संगीत वृंदगान की प्रस्तुति दी। इसके बाद वैशाली गुप्ता के निर्देशन में वाणी मंगल की प्रस्तुति दी गई। साथ ही कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति भारती बंधु ने रैदास के पदों की दी।

कपिल शर्मा व साथी कलाकारों ने राम राम कहि गावैगा, तब भेद अभेद सुनावैगा...से प्रस्तुति की शुरूआत की। इसी क्रम में तू मोहि देखे हौं तोहि देखू, प्रीत परस्पर होई तू मोहि देखे तो ही न देखूं यह मति सब बुधि खोई... पद को सुनाया तो उपस्थित श्रोताओं ने तालियों के साथ स्वागत किया। अगली कड़ी में सब घट अंतर रमसी निरंतर, मैं देखन नहीं जाना, गुन सब तोर मोर सब औगुन कृत उपकार न माना... भजन सुनाया। इस दौरान दस कलाकारों ने 11 पद और 10 दोहे प्रस्तुत किए।

संतों की वाणी गाने के लिए संत ही बनना पड़ता है

संतों की वाणी भारतीय संस्कृति का प्राण है और हमारे संत ही हमारी संस्कृति हैं। संतों की वाणी का गायन करने के लिए संत बनना जरूरी है। हमारा रहन-सहन, आचरण, चरित्र और वाणी संतों जैसी ही होनी चाहिए। तभी हम संतों का संदेश आमजन तक प्रभावी तरीके से पहुंचा सकते हैं। यह कहना था भक्ति संगीत के गायक भारती बंधु का। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को संतों की वाणी की शिक्षा दी जानी चाहिए। नई शिक्षा नीति में संत संगीत को शामिल भी किया गया है। अब सरकार को चाहिए कि हम जैसे भक्ति संगीत गुरुओं का लाभ ले। हालांकि स्कूल कालेज में इसकी आधारभूत जानकारी ही दी जा सकती है। पश्चिमी संगीत को लेकर उनका कहना था कि संगीत कोई खराब नहीं होता, लेकिन अपने संगीत का रसास्वादन हर भारतीय को आना चाहिए। भक्ति संगीत या भजन का जुड़ाव आत्म से है। इसमें प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन इसे वेस्टर्न म्यूजिक के साथ डुबाया नहीं जा सकता। इससे भक्ति संगीत की आत्मा ही मर जाएगी। उल्लेखनीय है कि पद्श्री सम्मान प्राप्त भारती बंधु भक्ति संगीत की पांचवीं पीढ़ी के गायक हैं।

Posted By: Ravindra Soni

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