भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। भौतिकता की चकाचौंध से भरपूर इस स्वार्थी दुनिया में कोई कितना भी निर्मम हो जाए, लेकिन एक मां के दिल में ममता हमेशा समाई रहती है और अपने बच्चों की पीड़ा पर वह ममता जागती है। मां कितना भी बड़ा बलिदान अपने बच्चे की खुशी के लिए कर सकती है। वह बच्चे की खातिर कुछ भी करने को तत्पर हो जाती है। मां की ममता को दर्शाते नाटक 'गबरघिचोर' का मंचन नर्मदा मंदिर में शनिवार को हुआ।

नाट्य प्रस्तुति विदेसिया नाट्य शैली में भोजपुरी भाषा में हुई। इसके लिए कलाकारों को एक माह तक भोजपुरी भाषा सिखाई गई। भिखारी ठाकुर द्वारा लिखित नाटक का निर्देशन रवींद्र मुंढे ने किया। नाटक में दिखाया गया कि 'गबरघिचोर' एक 13 वर्षीय लड़का है। नाटक की कहानी गलीच बहु, गलीच और गड़बड़ी के इर्दगिर्द घूमती कहानी है। विवाह के बाद गलीच पत्नी को गांव में छोड़कर पैसा कमाने के लिए कोलकाता जाता है। वहां जाकर वह अपनी पत्नी से किसी भी प्रकार का संपर्क नहीं रखता और 15 वर्ष बाद उसे जब पता चलता है कि गांव में उसकी पत्नी ने एक लड़के को जन्म दिया है, तब वह शहर से अपने बेटे को लेने के लिए वापस गांव आता है।

वह बच्चे पर दावा करता है तो दूसरी ओर उसकी पत्नी गिलीच बहू और गड़बड़ी नामक आदमी भी इस बच्चे पर दावा करते हैं। पंच सब के तर्क सुनने के बाद निर्णय सुनाते हुए कहते हैं कि बच्चे के तीन टुकड़े कर दिए जाएं और तीनों में अलग-अलग बांट दिए जाए। यह सुनकर मां का कलेजा फट जाता है और वह बच्चे पर अपना अधिकार त्याग देती है। अंत में पंच कहते हैं बच्चे पर मां का ही अधिकार है। उल्लेखनीय है कि त्रिकर्षि नाट्य संस्था द्वारा नर्मदा सेवा समाज के सहयोग से शनिवार को नाट्य श्रृंखला का आयोजन किया जा रहा है, जिसके तहत यह पहली प्रस्तुति थी। इस श्रंखला के तहत माह के तीसरे एवं चौथे शनिवार को नर्मदा मंदिर स्थित नाट्यगृह में शहर की नाट्य संस्थाओं को अपने नाटक का निश्शुल्क मंचन करने का अवसर प्राप्त होगा।

Posted By: Ravindra Soni

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