भोपाल(नवदुनिया रिपोर्टर)। पश्चिम से उधार ली आधुनिकता ने हमें अपने ज्ञान के मूलधारों से भटका दिया, किंतु लोक और जनजातीय समुदायों ने यह कार्य किया। उक्त उदगार पद्मश्री अलंकरण हेतु चयनित लोकसंस्कृति वेत्ता कपिल तिवारी ने मध्यप्रदेश लेखक संघ के स्वर्ण जयंती समारोह में व्यक्त किए। आपने, भाषा और साहित्य के नाम पर हो रहे राजनैतिक छलावे और खेमेबाजी के प्रति दुख प्रकट करते हुए कुछ और रचने के पहले खुद को रचने का आव्हान किया। आपने कहा कि संगीत, नृत्य, चित्रकला जैसे विषयों को भी साहित्य की परिधि में लाना चाहिए। समारोह के सारस्वत अतिथि संतोष चौबे ने कहा कि हिंदी साहित्य का सारा रस माधुर्य बोलियों से ही उपजा है। यह माधुर्य और भीगापन धीरे- धीरे सिमटता जा रहा है, लेकिन कस्बाई रचनाकारों ने इसे अभी तक कायम रखा है। उन्होंने लोक भाषाओं को महत्व देने हेतु लेखक संघ की सराहना करते हुए 50 वर्षीय यात्रा पूर्ण होने की बधाई दी। अपने अध्यक्षीय उद्बबोधन में पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण नहीं अपितु श्रृंगार है, जो दर्पण में उसकी छवि को परिष्कृत रूप में दिखाता है। आपने रचनाकारों से आग्रह किया कि वे ऐसा साहित्य सृजन करें, जिसमें लोक हित और लोक कल्याण निहित हो। प्रारंभ में संघ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. रामवल्लभ आचार्य ने संघ की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए इसे खेमेबाजी से सर्वथा मुक्त निरूपित किया।

दो दर्जन साहित्यकार सम्मानित: समारोह में ग्वालियर के गीतकार पं. राम प्रकाश अनुरागी को अक्षर आदित्य सम्मान, इंदौर के रवींद्र नारायण पहलवान को सारस्वत सम्मान तथा सागर के डॉ. सुरेश आचार्य को संतोष तिवारी समीक्षा सम्मान प्रदान किया गया। इनके अलावा चेतना भाटी, संतोष मोहंती एवं प्रदीप नवीन इंदौर, डॉ.अखिलेश बार्चे एवं राजनाथ सोहनी खरगोन, अनिरुद्ध सिंह सेंगर गुना, रफीक नागौरी उज्जैन, विजय बागरी कटनी,गिरिजा कुलश्रेष्ठ, ओजेंद्र तिवारी दमोह, सुभाष सिटोके हरदा तथा प्रभुदयाल मिश्र, प्रकाश परिहार, अशोक धमेनियां, मधु शुक्ला, घनश्याम मैथिल 'अमृत', सूर्य प्रकाश अष्ठाना 'सूरज' एवं कुमार चंदन भोपाल को विभिन्न सम्मानों से विभूषित किया गया। सर्वश्रेष्ठ इकाई का सम्मान सागर इकाई को दिया गया।

Posted By: Lalit Katariya

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