भोपाल (नवदुनिया रिपोर्टर)। कला विविधताओं के प्रदर्शन की सीरीज गमक के अंतर्गत शुक्रवार को बाबूलाल धोलपुरे और साथी, शाजापुर द्वारा मालवी शैली में कबीर गायन एवं आशीष धुर्वे और साथी, डिंडोरी द्वारा बैगा जनजातीय नृत्य परघौनी एवं करमा की प्रस्तुति हुई। आदिवासी लोक कला एवं बोली विकास अकादमी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बाबूलाल धौलपुरे और साथियों ने कबीर गायन की शुरुआत गुरु वंदना- भजो गुराजी को नाम परम सुखकारी... से हुई उसके बाद गुरूजी सरीका देव हमारे मन भाव..., चालो हो गुराजी का देश में..., वारियो म्हारो लहरयो रंग रंगीलो..., दुनिया दारी अवगुण हरिजन भेद मत कीजारी... एवं पानी में मीन चली आई... आदि कबीर पद प्रस्तुत किए। दूसरी प्रस्तुति आशीष धुर्वे एवं साथियों द्वारा बैगा जनजातीय नृत्य परघौनी एवं करमा की हुई। प्रस्तुति में मांदर वादन दयाराम एवं घासीराम ने और टिमकी वादन अमरसिंह ने किया तथा लालसिंह, सुग्रीव सिंह, सुकल सिंह, अशोक कुमार, सतलू सिंह, कृपाराम, अंजली, फूलवती, सुक्वती, सोनवती और प्रेमवती ने नृत्य में सभागिता निभाई। परघौनी एक विवाह नृत्य है, बारात की अगवानी में पुरुष विशेष वेशभूषा बनाकर हाथ में फरसा लेकर नाचते हैं। यह नृत्य नगाड़ों और टिमकी की ताल पर किया जाता है। करमा नृत्य में बैगा अपने कर्म को नृत्य-गीत के माध्यम से प्रस्तुत करते हैं, इसी कारण इस नृत्य-गीत को करमा कहा जाता है। इस कार्यक्रम का दर्शकों ने भरपूर लुत्‍फ उठाया। लाकडाउन के बाद धीरे धीरे स्‍थ‍िति सुधर रही है और कला के क्षेत्र में कार्यक्रम की संख्‍या भी बढती जा रही है। कलाकारों को भी अपना हुनर दिखाने का मौका फिर से मिल रहा है।

Posted By: Lalit Katariya

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

NaiDunia Local
NaiDunia Local
 
Show More Tags