भोपाल। भोपाल में दो नगर निगम बनाने के प्रस्ताव के बाद अब दोनों निगमों में संपत्ति और संसाधनों के बंटवारे को लेकर माथापच्ची शुरू हो गई है। दावे-आपत्ति बुलाने के बाद प्रस्ताव नगरीय प्रशासन मंत्री जयवर्धन सिंह की मंजूरी के लिए भेजा गया था। सूत्रों के मुताबिक सिंह ने अधिकारियों पूछा है कि दोनों नगर निगम में संपत्तियों का बंटवारा किस आधार पर होगा?

दरअसल, दो नगर निगम बनाने के बाद सबसे पेचिदा काम सुविधा, आय, संसाधन और संपत्ति के बंटवारे का है। निगम और जिला प्रशासन के अधिकारी भी इसे लेकर आशंकित हैं।

हाईकोर्ट में लगी याचिका, सुनवाई 31 अक्टूबर को

इधर, वाइस ऑफ भोपाल के सचिव विकास बोंद्रिया ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी है। उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि कलेक्टर भोपाल तरुण पिथोड़े ने नगर पालिका अधिनियम 1956 की धारा 405 (1) की शक्तियों का उपयोग करते हुए दो नगर निगम बनाने के संबंध में दावे-आपत्तियां आमंत्रित की हैं। नगर पालिका अधिनियम की इस धारा का उपयोग करने का अधिकार कलेक्टर के पास नहीं है।

इस धारा का उपयोग सिर्फ राज्यपाल ही कर सकते हैं। हालांकि इसी अधिनियम की धारा 405 (2) में कलेक्टर के पास लिखित आपत्ति प्रस्तुत करने का अधिकार है, लेकिन इस धारा में स्पष्ट है कि आपत्ति पर विचार भी राज्यपाल ही कर सकते हैं। इसी तरह धारा 405 (3) में आपत्ति पर विचार के बाद राज्यपाल ही इस क्षेत्र का बंटवारा कर सकेंगे। इस तरह यह अधिसूचना ही गलत जारी की गई है। उन्होंने हाईकोर्ट की डबल बेंच से अपील की है कि इस नोटिफिकेशन को रद्द किया जाए। मामले पर 31 अक्टूबर को सुनवाई होगी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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