भोपाल नवदुनिया प्रतिनिधि। भोपाल स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च ( आइसर ) के डिपार्टमेंट ऑफ बायोलॉजिकल साइंसेस के विज्ञानियों ने कम्प्यूटेशनल अध्ययन के जरिए यह बताया है कि कुछ दवाओं को कोरोना वायरस के इलाज के रूप में उपयोग किया जा सकता है। उसमें से कुछ पर क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है। वेरापामिल, कोल्चिसिन, डिलटिअजेम, डेफेरॉक्सामिन इन दवाओं का इस्तेमाल कोविड संक्रमण से बचने के लिए किया जा सकता है। इसमें सबसे खास बात यह रही कि इन विज्ञानियों द्वारा अनुमान लगाए गए इन ड्रग का पहले से ही क्लिनीकल ट्रायल चल रहा है। विज्ञानियों ने यह अध्ययन करने का प्रयास किया है कि आखिर इस कोरोना वायरस के संक्रमण में कौन सी दवाइयां कारगर सिद्ध हो सकती हैं। यह माना जाता था कि 2002 से पहले कोरोना वायरस को सर्दी-जुकाम करने वाला आम वायरस के रूप माना जाता था, लेकिन 2002 में सार्स कोवि वायरस की पहचान की गई, जो कोरोना वायरस परिवार का एक सदस्य है। सार्स कोवि वायरस 2002 में काफी लोगों की जान ली। फिर 2012 में मर्स कोवि वायरस जो ऊंट से इंसानों में संक्रमण फैला रहा था। इसकी पहचान की गई, लेकिन 2019 का सार्स-कोवि-2 वायरस से हर रोज लाखों लोग संक्रमित हो रहे हैं। यह अध्ययन डिपार्टमेंट ऑफ बायोलॉजिकल साइंसेस के सहायक प्राध्यापक डॉ हिमांशु कुमार, पांडीकन्न कृष्णमूर्ति, आतिरा एस राज ने मिलकर किया है। वे अब बहुत आश्वस्त हैं कि जल्द ही इन ड्रग का ट्रायल पूरा होगा और इसे उपयोग किया जा सकता है। --ड्रग को पता करने की कोशिश की विज्ञानियों ने सार्स कोवि, मर्स कोवि व सार्स कोवि-2 तीनों वायरस के संक्रमण होने के बाद जो प्रभाव हुआ है उसका मॉल्युकूलर लेवल पर तुलनात्मक प्रतिलेखन विश्लेषण ( कम्पेयरेटिव ट्रांसिक्रिप्टोम एनालिसिस) किया। तीनों वायरस से संक्रमित किए गए सेल का अध्ययन किया तो पाया कि कुछ जीन का एक्सप्रेशन कम हो रहा है तो कुछ का ज्यादा हो रहा है। फिर विज्ञानियों ने पाथवे एनालिसिस के माध्यम से इन सेल को लेकर दूसरे सॉफ्टवेयर के माध्यम से एनालिसिस किया कि जो ड्रग पहले से दूसरी बीमारियों में इस्तेमाल किया जाता है, क्या उनमें से किसी ड्रग को कोविड के बचाव के लिए इस्तेमाल कर कर सकते हैं। फिर उन्होंने सेल के संक्रमण डाटा को मानव के संक्रमण डाटा से तुलनात्मक अध्ययन किया। फिर उन्होंने कुछ ड्रग को लेकर अनुमान लगाया कि इन ड्रग का उपयोग कर सकते हैं, जो कि इस समय क्लिनीकल ट्रायल पर है। इन ड्रग का पहले से ही विश्व के कुछ हिस्सों में क्लिनीकल ट्रायल चल रहा है, जो इन विज्ञानियों ने अनुमान लगाया था कि जिनका उपयोग कर सकते हैं।

वर्जन

कोरोना वायरस के रोकथाम के लिए कुछ दवाईयों पर विश्वभर में पहले से क्लिनकल ट्रायल चल रहा है। अध्ययन करने से यह साबित हुआ कि इन दवाओं का उपयोग किया जा सकता है।

डॉ हिमांशु कुमार, विज्ञानी, आइसर

Posted By: Lalit Katariya

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