भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। प्रदेश में कोरोना मरीजों की संख्या लगातार चार दिन बढ़ने के बाद शुक्रवार को कम हुई है। 7065 सैंपलों की जांच में 107 मरीज मिले हैं। इनमें 20 भोपाल और 44 इंदौर के हैं। गुरुवार को 127 मरीज मिले थे। जबलपुर में एक मरीज की मौत भी हुई है। इसके साथ ही प्रदेश्ा में सक्रिय मरीजों की संख्या 636 हो गई है जो अप्रैल में 100 के नीचे आ गई थी। 62 मरीज स्वस्थ्ा हुए हैं। सक्रिय मरीजों में 255 इंदौर और 154 भोपाल में हैं। हालांकि, यह अच्छी बात है अभी सिर्फ 14 संक्रमित ही अस्पतालों में भर्ती हैं। बाकी होम आइसोलेशन में हैं। भर्ती मरीजों में दो संक्रमित और छह संदिग्ध आक्सीजन पर हैं।

प्रदेश में हर दिन करीब सात हजार सैंपलों की जांच की जा रही है , जबकि लक्ष्य हर दिन 25 हजार सैंपल जांचने का है। लक्ष्य के अनुसार सैंपलों की जांच की जाए तो प्रदेश्ा में हर दिन मिलने वाले मरीजों की संख्या 400 से ऊपर पहुंच सकती है। हालांकि, मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है। जांच और इलाज के लिए जो फीवर क्लीनिक बंद कर दिए गए थे, उन्हें भी शुरू नहीं किया जा रहा है। औचक सैंपलिंग भी न के बराबर है। भोपाल में इसके लिए सिर्फ तीन टीमें स्टेशनों पर लगाई गई हैं।

शुक्रवार को भोपाल में कोरोना के 20 नए मरीजों की पहचान हुई। कुल 295 सैंपलों की जांच में इतने मरीज मिले हैं। इस तरह संक्रमण दर 06.77 फीसदी रही। इससे एक दिन पहले शहर में 40 मरीज मिले थे। हालत यह है कि भोपाल में पिछले 05 दिन से कोरोना की संक्रमण दर के 06 से 11 फीसदी बीच बनी हुई है। इसके बाद भी लोग लापरवाह बने हुए हैं। भीड़भाड़ वाली जगह में भी कोई मास्क नहीं लगा रहा है। उधर ओमिक्रॉन के नए-नए शब्द वेरिएंट्स आने की वजह से मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

शहर के बड़े शापिंग मॉल्स में मास्क और सैनिटाइजर को लेकर कोई रोक-टोक नहीं है। स्कूल खुल गए हैं। 12 साल से कम उम्र के बच्चों का टीकाकरण भी नहीं हुआ है। इसके बाद भी मास्क लगाने को लेकर कोई बाध्यता नहीं है। यह हाल ज्यादातर स्कूलों का है।

हालांकि राहत की बात यह है कि सक्रिय मरीजों में से अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या 01 से 02 फीसदी ही है। उनमें भी एक या 2% ही गंभीर हैं। विशेषज्ञ इसकी बड़ी वजह कोरोनारोधी टीकाकरण को मान रहे हैं। एम्स के पूर्व निदेशक डा. सरमन सिंह का कहना है कि टीकाकरण से करीब 60 प्रतिशत बचाव हो जाता है। जो संक्रमित भी हो रहे हैं, वह गंभीर होने से बच जा रहे हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि सभी को सतर्कता डोज लगवा लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि बारिश के दिनों में वायरस से होने वाली बीमारियां बढ़ती हैं। इसलिए सतर्क रहने की जरूरत है।

Posted By: Ravindra Soni

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