भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। दुष्कर्म के जिस मामले को लेकर नौ माह पूर्व भोपाल रेल मंडल की जमकर किरकिरी हुई थी, उस मामले को हाईकोर्ट ने मंगलवार निरस्त कर दिया है। न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने अपने आदेश के जरिये पुलिस द्वारा दर्ज एफआइआर सहित समस्त कार्रवाई को अनुचित पाते हुए समाप्त कर दिया। दरअसल दुष्कर्म की शिकायत जिस महिला ने की थी, वह भोपाल रेल मंडल कार्यालय में ही कार्यरत थी और उसके द्वारा आरोप भी किसी और पर नहीं, बल्कि भोपाल रेल मंडल में डीआरएम से एक पायदान नीचे कार्यरत एडीआरएम गौरव सिंह पर लगाए गए थे। पुलिस ने इस मामले में बिना देर किए एडीआरएम के खिलाफ केस दर्ज कर लिया था। इतना ही नहीं, जांच पूरी होती उसके पहले रेलवे बोर्ड ने भी एडीआरएम का चेन्नई तबादला कर दिया था। उस समय इस पूरे मामले में लोगों ने रेलवे पर जमकर सवाल उठाए थे।

उल्लेखनीय है कि याचिकाकर्ता सिंह के विरुद्ध दुष्कर्म का प्रकरण दर्ज कराने वाली महिला ने यह स्वीकार किया था कि उसने अपने पति की प्रताड़ना से तंग आकर व वैवाहिक जीवन बचाने के लिए दुष्कर्म का झूठा आरोप लगाया था। इस बयान पर गौर करने के बाद हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में साफ किया कि महिला के अपने पति से शुरुआत से संबंध खराब थे, जिसकी शिकायत उसने हरदा व नर्मदापुरम पुलिस में दर्ज करवाई थी। महिला के पिता की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति संबंधित प्रकरण को लेकर उसका संपर्क एडीआरएम भोपाल गौरव सिंह से हुआ था। जिसके बाद रेलवे में महिला को नौकरी प्राप्त हुई थी। महिला ने आरोप लगाया था कि भोपाल रेलवे स्टेशन के रिटायरिंग रूम में रुकवा कर एडीआरएम ने उसके साथ दुष्कर्म किया। लेकिन सुनवाई के दौरान सबूत प्रस्तुत नहीं किए।

हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए

कोर्ट ने हरदा, गोविंदपुरा पुलिस व नर्मदापुरम पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब महिला पहले से अपने पति के खिलाफ मारपीट एवं दुर्व्यवहार की शिकायत कर रही थी तो उस मामले में कार्रवाई क्यों नहीं की गई। इसके विपरीत महिला ने पति के दबाव में जैसे ही एडीआरएम पर दुष्कर्म का आरोप लगाया तो तत्काल रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर लिया। बता दें कि सबसे पहले हरदा पुलिस के पास महिला ने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।

एडीआरएम को परेशान किया गया

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि एडीआरएम को उनके वरिष्ठ पद पर होने की वजह से प्रताड़ित करने का प्रयास किया गया है। लिहाजा, प्रकरण निरस्त किया जा रहा है।

Posted By: Ravindra Soni

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