भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। फादर्स-डे के एक दिन पहले बेटी की मौत से मां-बाप की गोद सूनी हो गई। दरअसल, उनकी इकलौती बच्ची की मौत बाथरूम में रखी पानी की बाल्टी में डूबने से गई। घटना के वक्त मां और पिता दोनों ही गहरी नींद में थे। बच्ची बिस्तर से कब उतरकर बाथरूम में पहुंच गई, किसी को पता नहीं चला। घटना मिसरोद थाना इलाके में शनिवार सुबह की है। बताया जा रहा है कि तबीयत ठीक न होने के कारण बच्ची के माता-पिता दवा लेकर सो रहे थे। पुलिस ने मर्ग कायम कर बिना पीएम कराए परिजनों को शव सौंप दिया है।

मिसरोद थाने के एसआई अरूण शर्मा के अनुसार निखिल नेशनल कॉलोनी निवासी सुरेंद्र रघुवंशी व्यापारी हैं। वह साफ- सफाई में उपयोग किए जाने वाले सामान के थोक विक्रेता हैं। वह मूलतः देवरी जिला रायसेन हैं। सुरेंद्र के परिवार में उनकी पत्नी के अलावा तीन वर्षीय बेटी आध्या रघुवंशी थी। शनिवार को सुबह छह बजे तक बच्ची अपनी मां के साथ ही बिस्तर में सो रही थी। तबीयत खराब होने के कारण सुरेंद्र और उनकी पत्नी दवा लेकर सो रहे थे। दवा के असर के कारण दोनों को गहरी नींद लग गई, जबकि बच्ची जाग रही थी। वह पलंग से उतरकर खेलते-खेलते घर के बाथरूम में पहुंच गई। जहां पानी से भरी एक बाल्टी रखी थी, जिसमें बच्ची मुंह के बल गिर गई। काफी देर तक वह पानी से भरी बाल्टी में डूबी रही थी।

जब परिजन जागे तो बच्ची बिस्तर पर नहीं मिली। तलाश की तो वह बाथरूम में पानी की बाल्टी में डूबी हुई थी। परिजन उसे नोबल अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां डेढ़ घंटे चले इलाज के बाद में सुबह करीब साढ़े नौ बजे डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

तीन दिन पहले भी पहुंच गई थी, तब देख लिया था

जांच अधिकारी शर्मा का कहना है कि सुरेंद्र ने बताया है कि बच्ची काफी चंचल थी। वह तीन दिन पहले भी बिस्तर से इसी तरह से उतरकर बाथरूम तक पहुंच गई थी। तब उन्होंने देख लिया था, जिसके कारण उसे बचा लिया गया था।

पड़ोसियों की बहुत लाड़ली थी

मासूम बच्ची अपने घर के आसपास पड़ोसियों की भी बहुत लाड़ली थी। उसके घर से निकलने पर प्यार दुलार करने वाले बुला लेते थे। हादसे की खबर लगते ही बड़ी संख्या में सुरेंद्र रघुवंशी के पड़ोसी भी अस्पताल पहुंच गए थे। जब तक उसका उपचार चला, सभी ईश्वर से प्रार्थना कर रहे थे। आध्या सुरेंद्र रघुवंशी की इकलौती बेटी थी। घटना से परिवार काफी सदमे में है।

बिना पीएम के परिजनों को सौंपा शव

परिजनों ने पुलिस को लिखित में दिया कि मासूम बच्ची काफी छोटी है। उन्हें किसी प्रकार की कोई शंका नहीं है। इसलिए वह उसका पीएम नहीं करना चाहते हैं। इस पर पुलिस ने संवेदनशीलता दिखाई और बिना पीएम कराए परिजनों को शव सौंप दिया।

जल्द ही स्कूल में भर्ती कराने वाले थे

पड़ोसियों का कहना है कि मासूम के लिए उसके परिजन स्कूल की तलाश कर रहे थे। वह छोटे-छोटे बच्चों के साथ हमेशा खेलती रहती थी। उसे जल्द ही किसी स्कूल में प्लेग्रुप या नर्सरी में प्रवेश दिलाने वाले थे। वह अक्सर अपने से बड़े बच्चों की किताब लेकर खेलने लग जाती थी। आध्या की इस तरह से जाने से पूरी कॉलोनी में मातम पसरा है।

छोटे बच्चों के माता-पिता ध्यान दें

- पानी से बच्चे बहुत आकर्षित होते हैं। इसलिए घर में यदि छह माह से पांच साल तक का बच्चा है तो बाथरूम में टंकी या बाल्टी में पानी भर कर न रखें।

- पानी गरम करने के लिए इलेक्ट्रिक रॉड के इस्तेमाल से बचें।

-बच्चों की पहुंच में आने वाले बिजली के शॉकेट पर टेप चस्पा करके रखें, क्योंकि बच्चे तार आदि मिलने पर इसमें डालते हैें।

-छह माह से डेढ़ साल तक के बच्चों को मूंगफली या मटर के दाने न खिलाएं। कुछ खिलौनों में भी ऐसे चीजें रहती हैं, उन पर नजर रखें।

(डॉ. राजेश टिक्क्स, एसोसिएट प्रोफेसर, शिशु रोग विभाग हमीदिया)

Posted By: Nai Dunia News Network