भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। राजधानी के शंकराचार्य नगर में स्‍थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में इन दिनों विशेष धार्मिक अनुष्‍ठान चल रहे हैं। बुधवार को मंदिर में श्री चौबीसी तीर्थंकर महामंडल विधान विश्व शांति महायज्ञ में इन्द्र, इन्द्राणियों का वेश धारण कर श्रद्धालुओं ने भगवान सिद्ध की आराधना की गई। श्री चौबीस तीर्थंकर भगवान महामंडल विधान का मांडना सजाया गया है। श्रद्धालुओं ने अष्ट द्रव्य का अर्घ्य समर्पित कर भगवान सिद्ध की पूजा-अर्चना की और संगीतमय स्वर लहरियों के साथ मंगल भजन गाते हुए भक्ति नृत्य किए।

इस अवसर पर मुनि निष्पक्ष सागर ने प्रवचन में कहा कि संसार में अच्छा या बुरा सब दृष्टि का फेर है। कोई भी बात हम अपनी दृष्टि से ही देखते हैं चलते समय हमारी दृष्टि पांवों की तरफ नहीं, भूमि की तरफ रहती है। इसकी वजह यह है कि यदि हमारे पैरो का संतुलन थोड़ा सा भी बिगड़ जाए तो दृष्टि का ध्यान उन्हें तत्काल नियंत्रित कर देता है। ज्ञान भी ध्यान से नियंत्रित होता है, ऐसा न होना पर ज्ञान की दिशा भी भटक जाती है। ध्यान की लगाम कसी रहे तो ज्ञान दिशाहीन नहीं होगा। ज्ञान को स्थिर बनाना चाहते हो तो ज्ञान को संयम का चोला ओढ़ा दो। असंयमित ज्ञान उस घोड़े की भांति है जिसकी लगाम तो हाथ में होती है, फिर भी वह हिनहिनाता रहता है।

मंदिर समिति के सचिव सुरेश जैन समर्धा ने बताया कि आज मुनिसंघ के सानिध्य में विश्व शांति महायज्ञ के साथ विधान का समापन होगा। इस अवसर पर समाज के मनोज बांगा, डॉ जितेन्द्र जैन, देवेन्द्र रूचि, कैलाश सिंघई, डॉ राजेश जैन, सुनील जैन अरिहंत, सुरेश जैन समर्धा, रीतेश नवकार, नितिन एमआर, प्रमोद कोटरी, जितेन्द्र, महेन्द्र सहित शंकराचार्य नगर मंदिर समिति के पदाधिकारी महिला मंडल, युवा मंडल और पाठशाला के सदस्य मौजूद थे।

Posted By: Ravindra Soni

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