भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। आत्मशुद्धि के महापर्व पर्युषण पर्व के दौरान शहर के जिनालयों में 10 धर्मों की आराधना की जा रही है। मंदिरों में सुबह से ही भगवान जिनेन्द्र और 24 तीर्थंकर भगवन्तों की प्रतिमा का अभिषेक करने श्रद्धालुओं का तांता लग जाता है। मंदिरों में मंगलवार को सत्य धर्म की आराधना के साथ व्याख्यान हुए।

आचार्य विद्या सागर महाराज के शिष्य मुनिश्री संभव सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में भगवान जिनेन्द्र की प्रतिमाओं का अभिषेक किया गया। प्रभु पुष्प दंत नाथ भगवान के निर्वाण दिवस पर जयकारों के साथ निर्वाण लाडू समर्पित किए गए।

चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रमोद हिमांशु, कार्याध्यक्ष मनोज बांगा ने बताया कि मुख्य निर्वाण लाडू समर्पित करने का सौभाग्य राजेश जी परिवार असम को प्राप्त हुआ। मुनिश्री संभव सागर महाराज ने आशीष वचन में कहा कि सत्य जीवन की धारा पदार्थ का स्वभाव वस्तु का धर्म है सत्य, सत्य ही है इसे समझने और जानने के लिये सत्य ही चाहिए। सत्य सूर्य को ढका जा सकता है, पर उसका अभाव नहीं किया जा सकता। सत्य प्रताड़ित हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं। सत्य आत्मा का अंखड ज्योति पिण्ड है, जिसका कभी विनाश नहीं होता।

श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर पिपलानी में पर्युषण पर्व के दौरान मूलनायक भगवान आदिनाथ का अभिषेक कर सत्य धर्म की आराधना की गई। यहां श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर जयपुर से पधारे पं. नितिन शास्त्री के निर्देशन में धार्मिक अनुष्ठान विधि-विधान से हो रहे हैं। मंगलवार को पंडित नितिन शास्त्री ने कहा कि सत्य वाणी का ही नहीं चर्या का भी विषय है। सत्य बोलना मुख का आभूषण है, पंच पर्मेष्ठि की आराधना करना हृदय का आभूषण है।

Posted By: Ravindra Soni

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