भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। नवरात्र के समापन पर गुरुवार से शुरू हुआ मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला शनिवार को भी देर रात तक चलता रहा। सुबह से देर रात तक मातारानी की प्रतिमाओं को प्रेमपुरा, रानी कमलापति सहित अन्य विजर्सन घाटों पर विसर्जित किया गया। एडीएम दिलीप यादव ने बताया कि 1800 से अधिक दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। सुरक्षा-व्यवस्था के विशेष प्रबंधन किए गए। किसी को विसर्जन के लिए पानी में नहीं उतरने दिया। नगर निगम प्रशासन की मदद से क्रेन से प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। इससे पहले पुराने व नए शहर के अलग-अलग इलाकों से मातारानी के भक्त प्रतिमाओं को गाजे-बाजे व जवारों के साथ लेकर विसर्जन घाटों पर पहुंचे।

शनिवार को कोलार, भेल, संत हिरदाराम नगर, होशंगाबाद रोड, अवधपुरी, अयोध्या नगर, करोंद, गांधी नगर, लालघाटी, जहांगीराबाद, शाजहांनाबाद, बरखेड़ी, जिंसी सहित कई इलाकों में मातारानी के भक्त गाजे-बाजे के साथ विसर्जन के लिए नृत्य करते चल रहे थे। इस दौरान मोती मस्जिद, रेतघाट, गिन्‍नौरी, कमला पार्क, किलोल पार्क होते हुए रानी कमलापति घाट पर प्रतिमाओं के विसर्जन की व्यवस्था की गई थी। वहीं पालीटेक्निक चौराहा से डिपो चौराहा, भदभदा तिराहा से प्रेमपुरा घाट भी मातारानी की प्रतिमाएं विसर्जन के लिए पहुंची। जहां पुलिस व प्रशासन की देखरेख में प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ। सभी विसर्जन घाटों पर सुरक्षा-व्यवस्था के विशेष प्रबंध किए गए थे। किसी को भी विसर्जन के लिए पानी में नहीं उतरने दिया गया।

रात में नौ बजे के करीब अचानक मौसम बदला और तेज बौछारें पड़ने लगीं। ऐसे लगा मानो इंद्रदेव भी मातारानी की इस विदाई प्रक्रिया में शामिल हों। इस बूंदाबादी ने भक्‍तों का जोश और बढ़ा दिया। करीब पौन घंटे हुई बारिश के दौरान भी घाटों पर प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला चलता रहा। इस दौरान कुछ जगहों पर भक्‍तगण विसर्जन के लिए ले जाई जा रही मातारानी की प्रतिमाओं बरसाती से ढकते नजर आए।

Posted By: Ravindra Soni

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