भोपाल। भोपाल लोकसभा सीट से भाजपा की साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कांग्रेस के दिग्विजय सिंह को 3 लाख 64 हजार वोटों से हराया है। साध्वी प्रज्ञा सिंह को 866482 वोट मिले जबकि कांग्रेस के दिग्विजय सिंह को 501660 मत प्राप्त हुए। इससे पहले 2014 में आलोक संजर ने पीसी शर्मा को 370000 वोटों से हराया था।

पूरा चुनाव हिंदुत्व के मुद्दे पर लड़ा गया और शुरु से ही तस्वीर प्रज्ञा ठाकुर के पक्ष में जाती दिखाई दे रही थी। यही वजह थी कि 21 पहर के मौन व्रत के बाद साध्वी पहली बार सामने आईं तो उनके मुंह से जय श्रीराम का नारा निकला। साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने भोपाल की जनता का आभार माना है।

इस लोकसभा सीट के इतिहास में पहली बार वर्ष 1951 में हुए चुनाव से लेकर 1962 तक तीन बार कांग्रेसी सांसदों ने जीत हासिल की। प्रथम लोकसभा चुनाव में सईद उल्लाह राजमी सांसद रहे फिर 1957 व 1962 में मैमूना सुल्तान जीते। इसके बाद जेआर जोशी 1967 में भारतीय जन संघ से जीते। कांग्रेस से पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने 1971 में 31 हजार 412 वोटों से विजय प्राप्त की। वर्ष 1977 में डॉ. शर्मा को भारतीय लोक दल से चुनावी मैदान में खड़े आरिफ बेग ने 1 लाख 8 हजार 526 वोट से हराया। उधर, 1980 में डॉ. शर्मा 13 हजार 602 वोट से फतह हासिल की। कांग्रेस पार्टी के आरिफ बेग 1977 में इस सीट से संसद पहुंचे। इसके बाद इस सीट से लगातार भाजपा का कब्जा रहा है।

वर्ष 1989 के बाद भाजपा का कब्जा

वर्ष 1989 के बाद इस सीट पर भाजपा अंगद के पांव की तरह काबिज हुई। वर्ष 1989 से 1998 तक सुशील चंद्र वर्मा चार बार सांसद रहे। इसके बाद मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती 1999 में यहां से सांसद चुनी गई। फिर भाजपा ने 2004 व 2009 में कैलाश जोशी को इस सीट से टिकट दिया। जोशी की जीत के बाद 2014 में भाजपा से आलोक संजर विजय रहे।

उलझा हुआ है जातिगत समीकरण

भोपाल लोकसभा सीट का जातिगत समीकरण भी उलझा हुआ है। यहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 5 लाख 30 हजार है। इसके अलावा ब्राम्हण, कायस्थ, आरक्षित वर्ग व क्षत्रिय मतदाताओं की संख्या सात लाख से अधिक है। लेकिन यदि इन्हें अलग-अलग बांटा जाए तो ब्राम्हण 3 लाख 50 हजार, कायस्थ 2 लाख 25 हजार, एससी-एसटी से 2 लाख और क्षत्रिय मतदाताओं की संख्या 1 लाख 25 हजार है। इस गणित के कारण यहां अल्पसंख्यक मतदाता निर्णायक भूमिका में माना जाता है।