भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को बिजली बिलों में गड़बड़ी और बिजली कटौती से जुड़ी शिकायतों को लेकर अलग-अलग अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ेंगे। बिजली कंपनी ने कटारा हिल्स, शक्तिनगर, वल्लभ नगर, शाहपुरा व विद्या नगर क्षेत्रों में इसकी शुरूआत कर दी है। कंपनी ने इन क्षेत्रों में राजस्व वसूली और मेंटेनेंस व्यवस्था को अलग-अलग बांट दिया है। इन कामों के लिए अमला भी अलग कर दिया है। यह प्रायोगिक तौर पर किया है, जिसे अगस्त में पूरे शहर में लागू करने की योजना है। मतलब देरी से बिल मिलने, उसमें गड़बड़ी होने, रीडिंग अधिक लेने, बिना रीडिंग लिए बिल देने, औसत रीडिंग का बिल देने और बिल की मूल प्रति नहीं मिलने की शिकायत अलग अधिकारी को करनी होगी और बिजली बंद होने, ट्रिपिंग से जुड़ी शिकायतें अलग अधिकारियों को करनी होंगी। अभी तक ये सभी शिकायतें एक ही अधिकारी को करनी पड़ती थी। बिजली कंपनी ने बिना पूर्व सूचना दिए और जोन में अमला बढ़ाए बगैर ये बदलाव किए हैं। अब उपभोक्ता परेशान हो रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यह व्यवस्था तभी सफल हो सकेगी, जब उपभोक्ताओं को इसकी जानकारी पूर्व से दी जाए। अलग व्यवस्थाओं के अनुरूप संबंधित अधिकारियों के नंबर सार्वजनिक किए जाएं और अमला बढ़ाया जाए।

ऐसे परेशान हो रहे उपभोक्ता

- बिजली कंपनी ने शिकायतों के निराकरण के लिए अलग-अलग प्लेटफार्म दिए हैं। शहर में जोनवार एई व जेई के मोबाइल नंबर पोर्टल पर सार्वजनिक किए हैं। अधिकारियों को निर्देश भी दिए हैं कि किसी भी स्थिति में मोबाइल बंद नहीं होना चाहिए। उपभोक्ता बिजली बंद होने, बिलों में गड़बड़ी होने पर सीधे क्षेत्र के बिजली अधिकारियों से दूरभाष पर संपर्क करते हैं। जिन क्षेत्रों में बिल वसूली व मेंटेनेंस व्यवस्था अलग-अलग की है, उन क्षेत्रों के उपभोक्ताओं का कहना है कि वे अब कॉल करते हैं तो उन्हें कहा जाता है कि बिजली कटौती से जुड़ी समस्याओं को दूसरे लोग देख रहे हैं, उन्हीं को बताओ। जिनके नंबर कंपनी ने अब तक सार्वजनिक नहीं किए हैं। हालांकि कंपनी का टोल फ्री नंबर 1912, वाट्सएप चैटबॉक्‍स नंबर व उपाए एप हैं, लेकिन उपभोक्ता ज्यादातर मामलो में सीधी बात क्षेत्र के जेई व एई से ही करते हैं।

- शहर में 24 जोन हैं। एक जोन में औसतन 18 से 25 हजार उपभोक्ता हैं। इसके अनुरूप एक जोन में 40 से 50 का अमला होना चाहिए, जबकि कहीं 18 तो कहीं 40 कर्मचारी ही कार्यरत हैं। इनमें से भी हर माह कोई न कोई सेवानिवृत्त हो रहा है। ऐसे में पहले से ही उपभोक्ता कर्मचारियों की कमी से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे थे। अब कंपनी ने अलग-अलग व्यवस्था बांटकर और मुश्किल बढ़ा दी हैं। जानकारों का कहना है कि कंपनी को पहले अमला बढ़ाना था, जो कि नहीं बढ़ाया है।

व्यवस्था अलग करने के पीछे तर्क

- राजस्व वसूली व्यवस्था के अलग होने से वसूली में बढ़ोतरी होगी। गड़बड़ी वाले बिल जल्दी सुधार दिए जाएंगे। बिलों के वितरण से लेकर रीडिंग लेने के काम जल्द होंगे।

- मेंटेनेंस (सुधार) व्यवस्था अलग करने से कटौती व ट्रिपिंग की नौबत कम आएगी। बिजली गुल होने पर जल्द सुधार हो सकेगा।

फैक्ट फाइल

- 4.60 लाख घरेलू उपभोक्ता हैं।

- 650 उच्च दाब उपभोक्ता हैं।

- 98 पावर सब-स्टेशन हैं।

- 80 फीडर 33 केवी के हैं।

- 360 फीडर शहर में 11 केवी के हैं।

- 24 जोन हैं शहर में।

- 18 से 25 हजार उपभोक्ता हैं एक जोन में।

- 18 से 40 कर्मचारी एक एक जोन में।

- 40 से 50 कर्मचारियों की जरूरत है एक जोन में।

Posted By: Ravindra Soni

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