भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। शहर के आसपास के जंगल जो वन्य प्राणियों के प्राकृतिक आवास के रूप में संरक्षित हैं, अधिकारियों की मिलीभगत से सीमेंट-कंक्रीट के जंगल में तेजी से बदल रहे हैं। इसके साथ ही भोपाल की जीवन रेखा कहे जाने वाले बड़े तालाब में अधिकारी, नेता व भूमाफिया ने कब्जा कर रखा है। हालांकि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने इन इलाकों में निर्माण पर रोक लगा रखी है। इसके बावजूद संरक्षित इलाकों में अंधाधुंध निर्माण कार्य चल रहे हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब इन निर्माण कार्यों पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार ने इसे संरक्षित इलाका घोषित किया है।

गौरतलब है कि राजधानी के पास केरवा, मेंडोरा, मेंडोरी और चंदनपुरा बाघ भ्रमण क्षेत्र है। लेकिन भू-माफिया इस इलाके में जमकर जंगल के बीच प्लाट काट रहे हैं। हालत यह है कि संरक्षित इलाकों में शैक्षणिक संस्थानों से लेकर बंगले, रिजार्ट और रेस्टोरेंट तक बन गए हैं। इस क्षेत्र के करीब दौ सौ हेक्टेयर में निर्माण किया जा चुका है। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब यहां जिन लोगों ने प्लाट खरादे हैं, वे पक्के निर्माण नहीं कर सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य शासन ने मेंडोरा, मेंडोरी और चंदनपुरा का 357.78 हेक्टेयर क्षेत्र संरक्षित वन क्षेत्र घोषित किया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि संरक्षित वन क्षेत्र का एक किमी का दायरा ईको सेंसिटिव जोन है, यहां न तो किसी प्रकार का पक्का निर्माण होगा और न खनन। इसके पहले एनजीटी ने भी रोक लगाई थी, इसके बावजूद यहां निर्माण जारी रहे।

एक किमी के दायरे में भी नहीं हो सकेगा निर्माण

शासन की जारी अधिसूचना के मुताबिक तय की गई सीमा के दायरे में उत्तर में मेंडोरा के मुनार क्रमांक 17 एवं संरक्षित वन खंड के मुनार क्रमांक 42 से 62 तक कृत्रिम वन सीमा रहेगी। पूर्व में संरक्षित वनखंड के मुनार क्रमांक 62 से 74, दक्षिण में मुनार क्रमांक 74 से 82 और मेंडोरा के मुनार क्रमांक 26 से 21 और पश्चिम में मेंडोरा के मुनार क्रमांक 21 एवं संरक्षित वन खंड के मुनार क्रमांक 83 एवं मेंडोरा के मुनार 19 से 17 तक सीमा रहेगी। इसमें तीनों गांवों का वह पूरा क्षेत्र शामिल है, जिसमें जंगल है। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार इन सीमाओं के आसपास एक किमी के दायरे में भी निर्माण नहीं हो सकेंगे।

नियमों का उल्लंघन कर सड़क बनाने की योजना

एनजीटी में वन संरक्षण संबंधी याचिका लगाने वाले राशिद नूर खान का कहना है कि संरक्षित वन क्षेत्र में तो झाड़ियां तक नहीं काटी जा सकती हैं, लेकिन यहां तो वन विभाग खुद ही उल्लंघन कर रहा है। चंदनपुरा में 50 हेक्टेयर क्षेत्र में वन विभाग नगर वन बना रहा है। इसके लिए जमकर पेड़ों की कटाई हुई है। पक्का ट्रैक बनाने के साथ यहां तालाब और बेंच भी बनवाई जा रही हैं। यहां कई बार काम के दौरान बाघ भी आ चुका है। इसके साथ निजी जमीनों के लिए भी वन के बीच से रास्ता देने की तैयारी चल रही है।

वनभूमि पर निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन किया जाएगा। आदेश की अवहेलना करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवई करेंगे।

-नीरज आनंद लिखार, सिटी प्लानर, नगर निगम भोपाल

Posted By: Ravindra Soni

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