भोपाल । गैस पीड़ितों के लिए संघर्ष का बड़ा अध्याय लिखने वाले अब्दुल जब्बार अब नहीं रहे। गुरुवार रात 10:30 बजे चिरायु अस्पताल में हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया। वह 63 साल के थे। ज्यादा डायबिटीज के चलते पैर की नसें ब्लाक होने से गैंगरीन हो गया था। शुरू में उन्हें कमला नेहरू अस्पपताल में भर्ती कराया गया था। यहां से छुट्टी के बाद घर चले गए। इसके बाद हालत बिगड़ी तो बीएमएचआरसी में भर्ती हो गए। यहां डॉक्टरों ने कहा कि इलाज की पर्याप्त सुविधाएँ नहीं हैं। लिहाजा 11 नवंबर को उन्हें चिरायु अस्पताल में भर्ती कराया गया। शुक्रवार को गरम गड्डा कब्रिस्तान में दोपहर 1:30 उन्हें सुपुर्दे खाक किया जाएगा।

गैस पीड़ितों के लिए अंतिम सांस तक लड़ते रहे जब्बार

मेरा इलाज हमीदिया में ही मुमकिन हो पाएगा, क्योंकि बीएमएचआरसी में इस तरह के विशेषज्ञ नहीं हैं। डॉक्टरों ने ऐसा कहा है। यह बात मॉनीटरिंग कमेटी को भी बताई जाएगी। इससे बड़ी शर्मनाक बात और क्या हो सकती है कि सुपर स्पेशियलिटी कहे जाने वाले इस अस्पताल में 13 साल बाद भी आधुनिक सुविधाएं नहीं हैं।"

वाट्सएप पर यह संदेश गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन के संयोजक रहे अब्दुल जब्बार ने पिछले शनिवार को हमीदिया अस्पताल में डॉक्टरों का इंतजार करते हुए लिखा था। दो दिन बाद उन्होंने एक दोस्त को परेशानी के चलते कुछ राशि इकठ्ठा करने के लिए वाट्सएप पर संदेश लिखा था।

चिरायु अस्पताल में गुरुवार रात उनका निधन हो गया। गैस पीड़ितों के लिए सुपर स्पेशियलिटी इलाज शुरू कराने के खातिर 35 साल तक संघर्ष करने वाले अब्दुल जब्बार को भी गैस राहत अस्पतालों में बेहतर इलाज नहीं मिला।

उनके साथियों का कहना है कि सरकार ने भी इलाज में मदद नहीं की। गुरुवार को उनसे मिलने चिरायु पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्वजय सिंह ने उन्हें एयर एंबुलेंस से मुंबई भेजने की बात कही थी। इसके पहले ही उनका निधन हो गया।

सुप्रीम कोर्ट तक में लगाई कई याचिकाएं

- मृतकों की संख्या 20 हजार व बीमारों की संख्या डेढ़ लाख मानते हुए मुआवजे के तौर पर 7728 करोड़ रुपए अतिरिक्त मांग के लिए सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका लगाई।

- बीएमएचआरसी में 2004 से 2008 के बीच ड्रग ट्रायल का मामला सामने आने पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई।

- 1998 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाकर गैस पीड़ितों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने की मांग की।

खूब संघर्ष किया

अच्छे काम के लिए लड़ने वाला साथी हमने खो दिया। उन्होंने गैस पीड़ितों के लिए खूब संघर्ष किया और उन्हें मुआवजा भी दिलाया। गैस पीड़ितों के हक के लिए वे लगातार लड़ते रहे। उनके किए गए संघर्ष को भुलाया नहीं जा सकेगा। - आरिफ अकील, मंत्री गैस राहत

अच्छा इलाज नहीं मिला

जब्बार भाई जिस तरह हमारे बीच से गए हैं, वह इस बात का सबूत है कि गैस पीड़ितों के इलाज के लिए सुपरस्पेशियलिटी भोपाल मेमोरियल और कमला नेहरू में इलाज की सुविधा उन्हें नहीं मिल पाई। - रचना ढींगरा, भोपाल ग्रुप फॉर इनफॉर्मेशन एंड एक्शन

खुद करते थे जिरह

हाईकोर्ट में उनके वकील रहते थे। इसके बाद न्यायाधीशों से कई बार वह खुद जिरह करते थे। न्यायाधीश भी उनकी बातें काफी गंभीरता से सुनते थे। उन्होंने संघर्ष की एक नई पटकथा लिखी है। - पुर्णेन्दु शुक्ला, सदस्य गैस राहत मॉनीटरिंग कमेटी

Posted By: Sandeep Chourey