भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (बीएमएचआरसी) में अब आधुनिक तकनीक से हार्ट की बायपास सर्जरी शुरू हो गई है। इस नई तकनीक में छोटा चीरा लगाया जाता है, जटिलताएं कम होती हैं, दर्द कम होता है और मरीज कम समय में स्‍वस्‍थ होकर आम जीवनचर्या की ओर लौट जाता है। बीएमएचआरसी के हृदय शल्य क्रिया विभाग में अब तक पांच मरीजों की इस तकनीक से सर्जरी की जा चुकी है।

बीएमएचआरसी में कार्यरत हृदय शल्य क्रिया विभाग के प्रमुख डा संजीव गुप्ता ने बताया कि इस पद्धति को मिनिमली इनवेसिव कोरोनरी आर्टरी सर्जरी (मिकास) कहा जाता है। इस तकनीक के जरिए मरीज के पसली के नीचे करीब चार इंच का छोटा चीरा लगाया जाता है, जबकि पुरानी तरह की पद्धति से होने वाली बायपास सर्जरी में छाती की हड्डी को काटना पड़ता है और करीब 8 इंच का चीरा लगाया जाता है। नई पद्धति में पसलियों के नीचे चीरा लगाने से छाती की हड्डी को काटने की आवश्यकता नहीं पड़ती। आपरेशन के दौरान मरीज को हार्ट-लंग बायपास मशीन पर भी नहीं रखना पड़ता। डा गुप्ता ने बताया कि नई प्रक्रिया भी पुरानी ओपन हार्ट सर्जरी की तरह ही प्रभावी है। छोटा चीरा लगाने व छाती की हड्डी न काटने की वजह से मरीज को आपरेशन के बाद दर्द कम होता है। आपरेशन के पांच-छह दिन बाद ही अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती है। अब तक पांच मरीजों का इस प्रक्रिया से सफल आपरेशन अस्पताल प्रबंधन कर चुका है। भोपाल में यह पहली बार हुआ है।

बीएमएचआरसी की निदेशक डा. प्रभा देसिकन ने बताया कि पूरे मध्य प्रदेश में बहुत कम ऐसे अस्पताल हैं, जहां मिकास पद्धति से बाइपास सर्जरी होती है।

मिकास के मुख्य फायदे

- छोटा चीरा, छाती की हड्डी न काटने से दर्द कम होना

- संक्रमण का खतरा और आपरेशन के बाद जटिलताएं कम

- कम रक्त का रिसाव

- अस्पताल से जल्दी डिस्चार्ज

- सर्जरी के छोटे व कम निशान

क्या होती है बायपास सर्जरी और मिकास

जिन मरीजों के हृदय की बंद या संकरी धमनियों को एंजियोप्लास्टी से नहीं खोला जा सकता, उनको बाइपास सर्जरी की सलाह दी जाती है। बाइपास सर्जरी में दिल को रक्त पहुंचाने वाली ब्लाक्ड धमिनियों को काटे या साफ किए बिना, ग्राफ्ट द्वारा एक नया रास्ता बनाया जाता है। इसके लिए एक स्वस्थ ब्लड वेसल (ग्राफ्ट) को छाती, हाथ या पैर से लिया जाता है और फिर प्रभावित धमनी से जोड़ दिया जाता है, ताकि ब्लाक्ड या रोग-ग्रस्त धमनी को बाईपास कर सकें। मिकास में पसली के नीचे एक छोटा चीरा लगाया जाता है और हड्डी को काटने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

भोपाल में इस तरह का यह पहला आपरेशन है, इसे सफलता से किया गया है। इसके परिणाम भी पूरी तरह से अच्छे आए हैं। आगे भी इस तरह के आपरेशन किया जाएगा।

- डा.संजीव गुप्ता, हृदय शल्य क्रिया विभाग

Posted By: Ravindra Soni

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