भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में स्कोलियोसिस विकृति (रीढ़ में असामान्य झुकाव की समस्या) का सफल आपरेशन किया गया है। इस आपरेशन में तीन प्रमुख चिकित्सकों की टीम को सात घंटे का समय लगा। 16 नवंबर को हुए आपरेशन के बाद युवक की हालत अब स्थिर बनी हुई है। सैम (परिवर्तित नाम) मध्यप्रदेश के सोहागपुर के रहने वाले हैं। इलाज के लिए प्रदेश के कई अस्पतालों में जाने के बाद उनका परिवार एम्स अस्पताल पहुंचा। यहां उसे साथ इडियोपैथिक रोलंबर होने का पता चला। तीन चिकित्सक डा. वीके वर्मा, डा. पंकज मिश्रा और डा. शिखा जैन के नेतृत्व में मरीज का आपरेशन किया गया। चिकित्सकों का दावा है कि भोपाल में इस तरह की यह पहली सर्जरी है।

क्या होता है स्कोलियोसिस

स्कोलियोसिस एक ऐसी विकृति है, जिसमें रीढ़ की हड्डी में दोनों ओर असामान्य झुकाव या कर्व आ जाता है। ज्यादातर मामलों में इसकी वजह का पता नहीं चल पाता है। किसी व्यक्ति की रीढ़ की हड्डी में 10 डिग्री से ज्यादा का घुमाव या झुकाव आ गया है, तो इसका मतलब है कि उसे स्कोलियोसिस है। अगर रीढ़ की हड्डी में घुमाव बहुत ज्यादा आ जाता है, तो इसके चलते छाती के बीच की जगह भी कम होती जाती है और फेफडों के सही तरीके से काम करने में भी परेशानी पैदा हो सकती है। इससे सांस लेने में तकलीफ होने लगती है।

स्कोलियोसिस होने के कारण

स्कोलियोसिस होने की वास्तविक वजह का पता ही नहीं चल पाता है। इसे अज्ञात कारक स्कोलियोसिस कहा जाता है। जिन मामलों में स्कोलियोसिस होने की वजह साफ तौर से पता चलती है, इसे दो श्रेणियों में रखा जा सकता है, नान स्ट्रक्चरल और स्ट्रक्चरल। नान स्ट्रक्चरल में हड्डी मुड़ी हुई तो लगती है, लेकिन उसके कार्य में कोई खास रुकावट या अड़चन देखने को नहीं मिलती है। कभी-कभार जब एक टांग दूसरी टांग से लंबी होती है, तो उसकी वजह से भी रीढ़ की हड्डी में घुमाव आ सकता है। स्ट्रक्चरल स्कोलियोसिस के कारकों में जन्मजात विकृति, सेलेब्रल पाल्सी यानी मस्तिष्काघात, इंफेक्शन या मस्क्युलर डिस्ट्रोफी आदि शामिल होते हैं। इस स्थिति में हड्डी में झुकाव काफी कठोर हो जाता है और उसका उपचार करना कठिन हो जाता है।

फैक्ट फाइल

स्कोलियोसिस तीन फीसदी लोगों में पाया जाता है। यह 10 वर्ष की उम्र से लेकर 20 वर्ष की उम्र तक के लोगों में नजर आता है। स्कोलियो शब्द ग्रीक भाषा का है, जिसका अर्थ है टेढ़ा होना।

मेरी जानकारी में यह भोपाल में इस तरह की पहली सर्जरी है। एम्स मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने का लगातार प्रयास कर रहा है। हम आने वाले दिनों में इससे गंभीर और महत्वपूर्ण सर्जरी करेंगे।

-डा. वीके वर्मा, एमएस आर्थोपेडिक

Posted By: Ravindra Soni

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