Bhopal Memorial Hospital And Research Center भोपाल। नवदुनिया प्रतिनिधि। सरकारी अस्पतालों में छोटी-छोटी कमियों की वजह से बड़े-बड़े उपकरण धूल खा रहे हैं। इसका एक उदाहरण भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर (बीएमएचएआरसी) की डिजिटल सबट्रैक्शन एंजियोग्राफी (डीएसए) मशीन का है। सात कराेड रुपए से तीन साल पहले लगाई गई इस मशीन को चलाने के लिए अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट ही नहीं हैं।

इस मशीन से किडनी, हाथ-पैर समेत किसी भी अंग की नसों में अवरोध पता करने और उसे हटाने का काम किया जाता है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में सबसे पहले बीएमएचआरसी में यह मशीन लगाई गई थी, पर यह बंद पड़ी है। इसके बाद एम्स में यह मशीन लगाई गई है। बाकी किसी भी अस्पताल में यह सुविधा नहीं है।

बीएमएचआरसी में यह मशीन फरवरी 2018 में लगी थी। इस मशीन से जांच व इलाज के लिए इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट की जरूरत होती है। मशीन आने के करीब तीन महीने बाद ही यहां के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अमन कुमार ने एम्स भोपाल ज्वाइन कर लिया। तब से यह बंद पड़ी है।

सीटी स्कैन और एमआरआई भी उनके जाने के बाद बंद हो गई थी। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने ई-रेडियोलॉजी सेवा के लिए कुछ निजी डॉक्टरों से अनुबंध किया तो अगस्त 2018 से यह दोनों सुविधाएं शुरू हो गईं पर डीएसए मशीन शुरू नहीं हो पाई, जबकि यह भी बहुत जरूरी है। वजह, यह सुविधा सरकारी अस्पतालों में सिर्फ एम्स और बीएमएचआरसी में है। बीएमएचआरसी में गैस पीड़ित मरीजों की इस मशीन से जांच व इलाज निशुल्‍क हो रहा था, जबकि निजी अस्पतालों में जांच पर चार से पांच हजार इलाज पर पांच हजार से 20 हजार रुपए तक खर्च आता है।

सोनोग्राफी की डेढ़ महीने बाद की दी जा रही तारीख

रायसेन की रहने वाली एक महिला पेटदर्द की तकलीफ होने पर इलाज कराने के लिए 6 अक्टूबर को बीएमएचआरसी आई। यहां डॉक्टरों ने सोनोग्राफी कराने की सलाह दी। रेडियोलॉजी विभाग में महिला को सोनोग्राफी की तारीख 24 नवंबर दी गई। हर मरीज को डेढ़ से दो महीने आगे तारीख सोनोग्राफी के लिए दी जा रही है, जबकि इतने दिन बाद सोनोग्राफी होने पर बीमारी बहुत ज्यादा बढ़ जाने का डर है।

रोज 8 से 10 मरीजों को इसी तरह से सोनोग्राफी की डेढ़ से दो महीने आगे की तारीख दी जा रही है। यह हाल तब है जब यहां पर दो नियमित सोनोलॉजिस्ट हैं। अस्पताल प्रबंधन ने एक निजी रेडियोलॉजिस्ट से भी हर दिन तीन घंटे के लिए अस्पताल आकर सोनोग्राफी करने का अनुबंध किया है। वह सुबह 9 से 12 बजे तक के लिए आते हैं। इस दौरान ही सोनोग्राफी हो पाती है। बाकी मरीजों को बाद में आने की सलाह दी जाती है।

इनका कहना है

अस्पताल में दो फुल टाइम सोनोलॉजिस्ट हैं, लेकिन वह सोनोग्राफी नहीं कर रहे हैं। मैंने दोनों की शिकायत गैस राहत निगरानी समिति व अधिकारियों से की है। दो महीने बाद सोनोग्राफी कराने की तारीख मिल रही है, ऐसी जांच का क्या फायदा है।

रचना ढींगरा संयोजक, भोपाल ग्रुप फॉर इंफार्मेशन एंड एक्शन

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस