भोपाल। Bhopal Minor Misdeed Case : नौ साल की मासूम से दुष्कर्म और हत्या के आरोपित को सजा सुनाने का दिन आया तो बच्ची के निवास स्थान मांडवा झुग्गी बस्ती के लोगों का अदालत के बाहर गुरुवार को हुजूम लगा हुआ था। बच्ची की मां भी अदालत पहुंची। जज कुमुदनी पटेल ने फैसला सुनाने से पहले उनसे पूछा कि आप क्या सजा चाहते हो, तो बच्ची की मां ने कहा कि इसें तो फांसी दे दो। इसके बाद जब विशेष न्यायाधीश ने हत्यारे विष्णु को दोहरे मृत्युदंड की सजा सुनाई तो पीड़िता की मां ने उनका धन्यवाद भी किया।

आरोपित घिनौनी मानसिकता का, कभी सुधार नहीं हो सकता

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपित घिनौनी मानसिकता का व्यक्ति है। उसके आचरण में कभी सुधार होने की संभावना नहीं है। आरोपित को अपराध करने के बाद भी आत्मग्लानी नहीं हुई। उसने लोगों को गुमराह करने के लिए झूठ बोला। उसने बच्ची को ऐसे फेंक दिया था जैसे गुड्डे-गुड़ियों के खेल में खिलौने से मन भर जाने पर कोई बच्चा खिलौने को एक तरफ फेंक देता है। ऐसी घिनौनी और विकृत मानसिकता वाले व्यक्ति के लिए मृत्युदण्ड से भी कोई कठोर दण्ड हो तो वह भी कम है।

पूरी तरह सामान्य दिखा विष्णु

अदालत ने आरोपित को सजा सुनाई लेकिन वह पूरी तरह सामान्य दिखाई दिया। उसने अदालत के सामने कोई भी गुहार नहीं लगाई और सजा सुनाए जाने के बाद चुपचाप सामान्य स्थिति में वापस अदालत हवालात की ओर चला गया। आरोपित के चेहरे पर कोई तनाव दिखाई नहीं दिया, न ही उसकी नजरें आम लोगों के सामने झुकी। उसके परिवार का कोई सदस्य नजर नहीं आया।

अदालत कक्ष के सामने मांडवा बस्ती के लोगों का हुजूम

अदालत कक्ष के बाहर महिला, बच्चियों और पुरुष सभी बेसब्री से फैसले का इंतजार कर रहे थे। भारी भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल सुरक्षा की दृष्टि से तैनात किया गया था। जैसे ही आरोपित को फांसी की सजा सुनाई गई, बाहर खड़ी भीड़ ने सकून की सांस ली।

भोपाल में दुष्कर्म और हत्या के आरोपी को फांसी के अन्य मामले

दिसंबर 2018: अफजल खान को अपनी छह वर्षीय बेटी से रेप और निर्मम हत्या के मामले में दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई।

2007: दिलीप बनकर को दुष्कर्म और हत्या के आरोप में फांसी की सजा सुनाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है।

33 दिन में ऐसे सजा तक पहुंचा केस

-08 जून को मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना हुई।

- पुलिस ने आरोपित के खिलाफ 16 जून को अदालत में चालान पेश कर दिया।

-18 जून को अदालत ने आरोपित के खिलाफ दुष्कर्म, हत्या, अपहरण और सबूत छुपाने के अपराध में आरोप तय किए।

- 20 जून से 6 जुलाई तक गवाही का दौर चला।

- 08 जुलाई को आरोपित के मुल्जिम बयान लिए गए, जिसमें उसने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इंकार कर दिया।

- 10 जुलाई को अदालत ने आरोपित को दोषी होने का फैसला सुनाया।

- 11 जुलाई को विष्णु को दोहरे मृत्युदंड की सजा सुना दी गई।

हाईकोर्ट में फैसला बरकरार रहे इसलिए पुलिस ने डीएनए रिपोर्ट पर जताया भरोसा

इस फैसले के खिलाफ आरोपित की ओर से यदि हाईकोर्ट में अपील की जाती है तो जिला अदालत का फैसला बरकरार रहे, इसके लिए पुलिस ने डीएनए टेस्ट और आरएफएसएल रिपोर्ट पर पूरा भरोसा जताया है। पुलिस ने मामले में डीएनए टेस्ट विशेषज्ञ और आरएफएसएल रिपोर्ट विशेषज्ञों के बयान कराए हैं। इस जांच रिपोर्ट को आरोपित के वकील खारिज करने में कामयाब नहीं रहे हैं। मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित है, जिसमें कोई प्रत्यक्षदर्शी साक्षी भी नहीं हैं। ऐसे मामलों में डीएनए टेस्ट और आरएफएसएल रिपोर्ट महत्वपूर्ण होती है।

आजीवन कारावास में बदली जा चुकी है सजा

फांसी की सजा पाए हुए लोगों को उनकी मानसिक स्थिति के आधार पर सजा कम करके आजीवन कारावास में बदल दी गई। वहीं एक मामले में तो आरोपित को बरी कर दिया गया। पुलिस ने पूर्व से ही मामले के आरोपित विष्णु भामौरे को मानसिकरूप से स्वस्थ्य बताने का प्रयास किया है। इस संबंध में तो अदालत ने भी आरोपित के द्वारा किए जा रहे नाटक को गंभीरता से लेते हुए चालाक अपराधी मान लिया है।

2012 से 2019 के बीच में 39 दोषियों को मिला है मृत्युदंड, 23 पर केस लंबित

2012 से 2019 के बीच प्रदेशभर में अपहरण, दुष्कर्म और हत्या से जुड़े केसों में 39 आपराधियों को दोषी पाते हुए जिला अदालत से मृत्युदंड दिया है। वर्तमान में इन 23 दोषियों के केस सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। 20 प्रकरणों में स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) लंबित हैं, जबकि 3 केसों में एसएलपी पर फैसले के बाद रिव्यू पिटीशन पर अटका है। 11 दोषी बंदियों की अपील मप्र हाईकोर्ट की जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर बैंचों में लंबित हैं। पांच मामलों में अपील प्रक्रियाधीन है।