भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। बैरसिया तहसील के नजीराबाद क्षेत्र के 20 किसानों को अधिक बारिश से नष्ट हुई फसल का मुआबजा नौ साल बाद मिलेगा। किसानों ने मुआवजे के लिए जिला उपभोक्ता आयोग से लेकर राज्य उपभोक्ता आयोग तक अपील लगाई। अब जाकर उन्हें न्याय मिला है। राज्य उपभोक्ता आयोग ने अपने फैसले में जिला आयोग के आदेश को यथावत रखते हुए कहा कहा कि चार माह के अंदर पीड़ित किसानों को निर्धारित मुआवजा को-आपरेटिव सोसायटी लौटाएं।

दरअसल, नजीराबाद ग्राम के सैकड़ों किसानों का प्रीमियम तो काट लिया गया, लेकिन जब अधिक बारिश होने के कारण सोयाबीन की फसल नष्ट हो गई तो किसानों को मुआवजा नहीं मिला। मामले में बीमा कंपनी ने किसानों को मुआवजा देने से इसलिए मना कर दिया, क्योंकि सोसायटी ने प्रीमियम जमा नहीं किया था। इस मामले की पैरवी उसी क्षेत्र के एक वकील ने निश्शुल्क की है। मामले में जिला उपभोक्ता फोरम में 2013 में किसानों की तरफ से को-आपरेटिव सोसायटी और को-आपरेटिव सेंट्रल बैंक लिमि के खिलाफ याचिका लगाई गई थी। सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने तर्क रखा कि सोसायटी की तरफ से 20 किसानों की प्रीमियम की राशि जमा नहीं की गई। इसके बाद किसानों ने राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील लगा दी। आयोग के अध्यक्ष शांतनु एस केमकर, सदस्य श्याम सुंदर बंसल व सदस्य डा. श्रीकांत पांडेय ने किसानों के पक्ष में फैसला सुनाया।

यह है मामला

किसानों के वकील रणधीर सिंह ने बताया कि ग्राम नजीराबाद, धामनतोड़ी और बड़वेली के करीब तीन हजार किसानों ने नजीराबाद की सहकारी समिति से वर्ष 2013 में कर्ज लिया था। कर्ज लेते ही राष्ट्रीय फसल बीमा योजना के तहत संबंधित किसान की फसल बीमित हो जाती है। उसका प्रीमियम भी बैंक द्वारा काटकर संबंधित बीमा कंपनी को भेजा जाता है। इन किसानों का प्रीमियम तो काटा गया, लेकिन बीमा कंपनी में जमा नहीं किया गया। 2013 में अतिवृषिट के कारण सोयाबीन की फसल तबाह हो गई। किसानों ने मुआवजे की मांग की तो पता चला कि प्रीमियम जमा नहीं होने के कारण उन्हें बीमा कंपनी मुआवजा नहीं दे सकती।

किसानों के लिए निश्शुल्क इस केस को नौ साल तक लड़ाई लड़ी, लेकिन आज खुशी हो रही है कि किसानों को मुआवजा देने का फैसला सुनाया गया।

- रणधीर सिंह, किसान पक्ष के वकील

Posted By: Ravindra Soni

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