दीपक विश्वकर्मा। भोपाल। Bhopal News राजधानी में मंगलवार देर रात को भोपाल के नवाब खानदान से जुड़े 100 साल पुराने दस्तावेजों से भरा ट्रक अहमदाबाद पैलेस के सामने पकड़ाए जाने के बाद इस खानदान की संपत्तियों को लेकर चल रहा विवाद भी फिर सामने आने लगा है। यह विवाद पांच जिलों में फैला हुआ है।

जहां नवाब हमीदुल्ला खान की हजारों एकड़ संपत्ति हैं। दरअसल, 31 जुलाई 2019 को रामपुर स्टेट के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने नवाब की संपत्तियों के बंटवारे पर एक फैसला सुनाया था। इसमें कहा गया कि नवाब संपत्तियों का बंटवारा मुस्लिम विधि से ही होगा। इस स्थिति में अब हाईकोर्ट में एक अपील दायर की गई है, जिसमें इस फैसले का हवाला देकर संपत्ति पर अधिकार के लिए 20 से अधिक लोगों ने उत्तराधिकारी होने का दावा पेश किया है। अगर इनके पक्ष में फैसला हुआ तो नवाब संपत्ति के 20 से अधिक टुकड़े हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि नवाब संपत्तियों का अधिकांश रिकॉर्ड भोपाल में अहमदाबाद पैलेस, फ्लैग स्टाफ हाउस, मोटर गैराज व रायसेन जिले के चिकलौद में है।

आशंका है कि नवाब खानदान से जुड़े दस्तावेजों को नष्ट करने की कोशिश की जा रही है, ताकि संपत्ति का बंटवारा न हो सके। मंगलवार को नवाब संपत्तियों से जुड़े 100 साल पुराने दस्तावेजों से भरा ट्रक अहमदाबाद पैलेस के सामने से मिलने पर इस बात को बल मिल रहा है। जब रिकॉर्ड ही नही होगा तो बंटवारा कैसे हो पाएगा। भोपाल, रायसेन, सीहोर समेत कुछ अन्य स्थानों पर नवाब खानदान की बहुत सी संपत्ति बेची भी जा चुकी हैं। सबसे बड़ा विवाद शत्रु संपत्ति और अहदाबाद पैलेस को लेकर है।

2000 में फैसला था कि गद्दी उत्तराधिकार अधिनियम से होगा बंटवारा : नवाव संपत्ति के बंटवारे को लेकर उच्च न्यायालय में बंटवारे के संबंध में एक फैसला जिला अदालत से फरवरी 2000 में हुआ था। यह फैसला दो मामलों में दिया गया। एक में नवाब हमीदुल्ला की बेगम मेमुना और राबिया तो दूसरे में औबेदुल्ला खां की बेगम सुरैया बेगम की ओर से दायर याचिका में दिया गया। फैसला था कि नवाब हमीदुल्ला की संपत्ति की वारिस गद्दी उत्तराधिकार अधिनियम के तहत मंजली बेटी साजिदा सुल्तान ही होंगी।

इस फैसले के आधार पर मई 2000 में उच्च न्यायालय ने स्टे जारी करते हुए कहा था कि साजिदा सुल्तान की संपत्ति न तो खरीदी जा सकती हैं और न ही बेची जा सकती हैं। यह आज भी लागू है। साजिदा सुल्तान के बाद उत्ताराधिकार अधिनियम के चलते भोपाल के नवाब के तौर पर उनके बेटे मंसूर अली खान पटौदी को नवाब बनाया था। मंसूर अली की मृत्यु के बाद उनके बेटे सैफ अली और शर्मिला टैगोर उनके वारिस हुए। सारी संपत्तियां अब इन लोगों की देखरेख में है। इस बीच नवाब भोपाल की संपत्ति के कुछ दस्तावेज खुर्द बुर्द भी हुए। वहीं शत्रु संपत्ति का विवाद भी हुआ था।

बता दें कि गद्दी उत्तराधिकार अधिनियम के तहत बड़े बेटे या बेटी को वारिस बनाया जाता है। इस स्थिति में हमीदुल्ला खान की उत्तराधिकारी उनकी बड़ी बेटी आबिदा सुल्तान होगी। वह पाकिस्तान में बस गई थी। उनकी मृत्यु हो चुकी है। ऐसे में उनका बेटा शहरयार खान जो शत्रु देश पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय में थे, उत्तराधिकारी हो सकते हैं। उनके पाकिस्तान में होने के कारण यहां नवाब की सभी संपत्तियां शत्रु संपत्तियों के दायरे में आ सकती हैं।

बता दें कि भोपाल में कोहेफिजा, ईदगाह हिल्स, लालघाटी, हलालपुरा, बोरबन, बहेटा, बैरागढ़, लाऊखेड़ी, गिन्नाौरी, तलैया, नव बहार फल-सब्जी मंड़ी, ऐशबाग स्टेडियम क्षेत्र, कोटरा सुल्तानाबाद, इस्लाम नगर, खजूरी और सीहोर और रायसेन जिले का कुछ इलाका भी शत्रु संपत्ति की जद में आ सकता है।

यह है शत्रु संपत्ति विवाद

नवाब हमीदुल्ला खान के नाम पर सभी संपत्तियां थीं। उनकी मौत 1960 में हो गई, लेकिन 1951-52 में उनकी बड़ी बेटी आबिदा सुल्तान भारत छोड़कर पाकिस्तान चली गईं थीं। गद्दी उत्तराधिकार अधिनियम के तहत नवाब की मौत के बाद सबसे बड़ी संतान होने के नाते आबिदा सुल्तान को उत्तराधिकारी बनाया जाना चाहिए था। सारी संपत्ति उनके कब्जे में आना चाहिए थी, लेकिन वह भारत छोड़ चुकी थीं।

इसलिए 1962 में नवाब की मंझली बेटी साजिदा सुल्तान को उत्तराधिकारी घोषित कर दिया गया। 1995 में साजिदा सुल्तान की मौत के बाद उनके बेटे नवाब मंसूर अली खान पटौदी को उत्तराधिकारी बनाया गया। उनकी मृत्यु के बाद उनके सैफ अली खान वारिस बने। लेकिन अब केंद्र सरकार आबिदा सुल्तान को नवाब की संपत्ति का उत्तराधिकारी मानते हुए शत्रु संपत्ति अधिनियम 1968 के तहत सभी संपत्ति को अपने कब्जे में ले सकती है।

इस बीच सैफ अली खान ने नवाब की तमाम संपत्ति को शत्रु संपत्ति घोषित करने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। केंद्र सरकार के मुंबई स्थित शत्रु संपत्ति कार्यालय द्वारा नवाब की सभी चल-अचल संपत्तियों को शत्रु संपत्ति घोषित कर देने से उस संपत्ति को खरीदने और रहने वाले लोग भी इसकी जद में आ गए हैं। अपनी याचिका में सैफ अली ने केंद्रीय गृह मंत्रालय, शत्रु संपत्ति कार्यालय और मध्य प्रदेश के राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव को पार्टी बनाया है।

जानकारी के अनुसार ट्रक से जब्त दस्तावेज गुजरात के व्यापारी ने भोपाल के अंतिम नवाब हमीदुल्ला खान के परिवार की फातिमा सुल्तान से खरीदने की बात कही है।

क्राइम ब्रांच ने जांच के लिए फातिमा सुल्तान से भी संपर्क किया। फातिमा सुल्तान ने पुलिस को बताया है कि यह दस्तावेज भोपाल में उनके आधिपत्य के स्टोर रूम में कई सालों से रखे थे। उसमें कोई महत्वपूर्ण दस्तावेज नहीं हैं। फातिमा सुल्तान नवाब हमीदुल्लाह की सबसे छोटी बेटी राबिया की बहू हैं।

Posted By: Hemant Upadhyay

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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