Bhopal News : भेल। दिल्ली प्रबधंन के फैसले के बाद अब 23 जून को यूनियन चुनाव के मतदान होना निश्चित हो गया है जिसके लिए भेल भोपाल सहित अन्य यूनिटो में भी चुनावी तैयारियां शुरू हो गई है। भेल भोपाल के बात करे तो यहां पर 5 सीटो के लिए मतदान होगा। अभी पांच सीटो में से तीन सीटो पर इंटक और एक पर बीएमएस व एक पर एबू है। भेल भोपाल की नंबर एक यूनियन इंटक को अपने स्थान पर बने रहने की चुनौती है तो बीएमएस को अन्य यूनियनो को कड़ी टक्कर देकर एक नंबर बनने की चुनौती है। अब देखना होगा कि भेल कर्मचारी किस यूनियन को अपने मतो से नंबर एक की कुर्सी पर बिठाती है।

इंटक और बीएमएस का दिल्ली में दबदबा

इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजीवा रेड्डी सेंट्रल लीडर है जो कि दिल्ली में श्रमिको की बात दमदारी से रखते है।चाहे वह बोनस की बात हो या पे रिवीजन की बात हो सभी बैठको में प्रबंधन को बात मनवाने की कूबत रखते है। ज्यादातर मामलो में प्रबंधन उन्हे तवज्जो भी देता है। वही बीएमएस के संेट्रल लीडर अंगू स्वामी निजीकरण का विरोध कर कर्मचारियों के हितैषी के रूप में जाने जाते है अंगू स्वामी कर्मचारियों के लिए सरकार से भी भिड़ जाते है। भोपाल से लेकर हर यूनिटो में बीएमएस और इंटक की अपनी एक अलग पहचान है।

निष्क्रिय यूनियने भी चुनावी फायदे के लिए मैदान में

पांच साल तक भेल कर्मचारियो की समस्याओ से अपने आप को एक दम अलग रखने वाली यूनियने चुनावी कार्यक्रम जारी होते ही कर्मचारी हितैषी होने का दावा करने लगी है जबकि भोपाल में एेसी भी कुछ यूनियने है जिनका भोपाल यूनिट के बाहर कोई नाम तक नही जानता। फिर भी दिल्ली में दम भरने का दावा करने लगी है। भले ही उनकी यूनियनो में कार्यकार्यणी के सदस्य भी पूरे न हो। भेापाल में एबू , केटीयू, सीटू, एचएमएस , उत्कृष्ठ एेसी यूनियने है जिन्होने ने अपने कार्यप्रणाली से ख्ुाद ही अपना जनाधार खो दिया है। कर्मचारियों को इन यूनियनो से विश्वास उठ गया है। लेकिन फिर भी चुनाव में जोर पकडऩे के लिए तैयार है। एबू ने पिछले चुनाव मे ंनंबर देा की पेाजीशन हासिल की थी लेकिन इस बार रामनारायण गिरी के कार्यप्रणाली से नाराज होकर यूवाओ ने दूरी बना ली है।

Posted By: Lalit Katariya

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