भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल के बाल चिकित्सा हीमेटोलाजी विभाग ने कीमोथेरेपी और 192 यूनिट रक्त चढ़ाकर ब्लड कैंसर से पीड़ित बच्चे की जान बचाई गई है। एम्स के उक्त विभाग के चिकित्सक इस तरह की सफलता को लेकर काफी उत्साहित हैं।

दरअसल एक्‍यूट प्रोमायलोसाइटिक ल्यूकेमिया (एपीएमएल) खून और बोन मैरो (हड्डी के अंदर जहां खून बनता है) में होने वाला कैंसर है। यह बच्चों और किशोरों में पाया जाने वाला सबसे आम कैंसर है। भारत में हर साल लगभग 12000 बच्‍चे इससे ग्रस्‍त पाए जाते हैं। एम्स से मिली जानकारी के मुताबिक 14 वर्षीय बच्चे ने इस गंभीर बीमारी से ग्रस्‍त होने के बाद हर दिन जीवन मौत के साथ संघर्ष किया है। शुक्रवार को अस्पताल से उसके पूरी तरह से स्वस्थ होने के बाद छुट्टी दे दी गई।

दो महीने पहले बच्चे को बुखार, खून बहने और आंखों की रोशनी कम होने की शिकायत के साथ चिकित्सा आइसीयू में भर्ती किया गया था। चिकित्‍सकीय जांच में उसे एपीएमएल का पता चला और उसी दिन इलाज शुरू किया गया। रोजाना खून चढ़ाने के बावजूद उसकी आंत और दिमाग के अंदर से भयानक रक्त रिसाव के दौर से गुजरना पड़ा। अंत में विशिष्ट उपचार काम करने लगा और लगभग एक महीने आइसीयू में रहने और 192 यूनिट रक्त चढ़ाने के बाद उसे बचा लिया गया। अब उसका रक्त परीक्षण सामान्य हो गया। पैथोलाजी विभाग के लैब सपोर्ट और एम्स भोपाल ब्लड बैंक के ब्लड सपोर्ट में इस बच्चे को बचाया जा सका। अब उसका बोन मैरो टेस्ट पूरी तरह सामान्य आया है।

केक काटकर घर भेजा

बच्चे के स्‍वस्‍थ हो जाने पर एम्‍स के स्टाफ में भी काफी खुशी और उत्साह देखा गया। उन्‍होंने बच्चे को केक काटकर घर के लिए रवाना किया गया। इस दौरान स्टाफ के सभी लोग मौजूद रहे। डा. भावना डींगरा ने माता-पिता के धैर्य और उपचार में विश्वास के लिए उनकी प्रशंसा की।

Posted By: Ravindra Soni

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