भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। प्रोजेरिया बीमारी से पीड़ित शाहजहांनाबाद की रहने वाली आठ साल की गुंजन के इलाज का खर्च अब अमेरिका का प्रोजेरिया रिसर्च फाउंडेशन उठाएगा। फाउंडेशन के अध्यक्ष डा. गोरगोन ने इसकी सहमति दे दी है। वह गुंजन के माता-पिता से एक जुलाई को वीडियो काल पर बातचीत करेंगे। इसके बाद आगे का इलाज कहां करना है, इसकी योजना बनाई जाएगी। बता दें कि इसके पहले गुंजन के ब्लड से जुड़ी जांचें भी अमेरिका जाकर करवाई गई थीं, जो काफी महंगी थी। फाउंडेशन ने उसका खर्च उठाने की भी सहमति दी है। गुंजन के अभिभावकों की मदद करने वाले डा. जीशान हनीफ ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि गुंजन के पिता गोपाल शाक्य प्राइवेट काम करते हैं। उनकी आय बहुत कम है। इन्होंने बेटी के इलाज के लिए मदद मांगी थी, इसलिए फाउंडेशन मदद को आगे आया।

क्या है प्रोजेरिया बीमारी

प्रोजेरिया एक लाइलाज बीमारी है। जो करोड़ों बच्‍चों में से किसी एक को होती है। इसमें शरीर की वृद्धि रुक जाती है। त्वचा का रंग बदल जाता है। ऐसे बच्चे कम उम्र में बुजुर्ग व्यक्ति की तरह दिखाई देने लगते हैं। इनके बाल भी कम होते हैं या जो रहते हैं वह तेजी से झड़ जाते हैं। सिर व चेहरे का आकार शरीर के अन्य हिस्सों के आकार की तुलना में बड़ा हो जाता है। ये बहुत कम समय तक जीवित रह पाते हैं।

तब एक दिन में बन गया था आधार कार्ड

गुंजन जिस स्कूल में पढ़ती है उस स्कूल द्वारा उसका आधार कार्ड मांगा जा रहा था। जब गुंजन के पिता उसे लेकर आधार कार्ड बनवाने केंद्र पर पहुंचे तो काफी प्रयासों के बावजूद उसका आधार कार्ड नहीं बन पाया था। तब इसकी वजह उसके शरीर की त्वचा का रंग बदलना और रूखापन आना था। काफी प्रयास किए गए, जब सफलता नहीं मिली तो आधार केंद्र के संचालक द्वारा नोडल एजेंसी के दिल्ली कार्यालय को पूरे मामले से अवगत कराया गया था और तब एक दिन में आधार कार्ड बनकर आ गया था।

Posted By: Ravindra Soni

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