Bhopal News : भोपाल। नवदुनिया प्रतिनिधि। मैन्युअली जाति प्रमाण पत्र को डिजिटल में बदलने के लिए अनुसूचित जाति-जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्र लोक सेवा केंद्र में आवेदन कर रहे हैं, लेकिन एसडीएम और लोक सेवा केंद्र के संचालक उनके साथ धोखाधड़ी कर रहे हैं। डिजीटल जाति प्रमाण पत्र सहित अन्य राजस्व मामलों को लेकर अनॅलाक 2 के बाद न तो एसडीएम गंभीर नजर आ रहे है और ना ही लोक सेवा केंद्र संचालक।

मूल आवेदन प्राप्त नहीं लिखकर एसडीएम धड़ल्ले से पुराने आवेदन निरस्त कर रहे हैं। शहर में ऐसे करीब 7 हजार राजस्व मामले लंबित है। खास बात तो यह है कि मार्च में आवेदन निरस्त करने की सूचना भी जुलाई में दी गई। इससे अब आवेदक इसकी अपील भी नहीं कर सकता हैं।

दरअसल, 22 मार्च से बंद लोक सेवा केंद्र 29 जून तक बंद रहे और जनता का कोई काम नही हुआ। मगर अब लोक सेवा केंद्र खुलने पर जो स्थिति सामने आई वह जनमानस के लिये दुखदायी साबित हो रही है। नतीजतन लोकसेवा केंद्र में जमा आवेदन खारिज कर दिए गए और कारण भी नही दर्शाया जा रहा है। सबसे अधिकार एमपी नगर वृत्त के मामले सामने आए हैं और इन मामलो में जिम्मेदार अधिकारी एक दूसरे पर आरोप लगा रहे है।

30 प्रतिशत आवेदन मनमाने ढंग से किए रिजेक्ट

मैन्युअली जाति प्रमाण पत्र बनाने में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद भोपाल सहित प्रदेशभर में अनूसूचित जाति-जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग के स्टूडेंट के मैन्युअली से डिजीटल जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अभियान 2018 से चलाया जा रहा है। अभियान के तहत सामने आ रहा है कि 30 प्रतिशत से ज्यादा आवेदन अफसर मनमाने ढंग से निरस्त कर देते है। कई मामले तो ऐसे है जिसमें आवेदन निरस्त कर दिया गया लेकिन इसका कारण ही नहीं बताया जा रहा है। इससे आवेदक के सामने असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

...तो कहां जा रहे आवेदन और गड़बड़ी किसकी, जांच का विषय

भोपाल में चार लोक सेवा केंद्र संचालित हैं। बैरसिया लोक सेवा केंद्र को छोड़ दिया जाए तो अन्य तीन केंद्रों से भोपाल शहर में स्थापित छह एसडीएम कार्यालयों की दूरी केवल 5 से 10 किलोमीटर हैं। कुछ केंद्र तो कलेक्टर या एसडीएम कार्यालय के पास चंद कदमों की दूरी पर संचालित हो रहे हैं। बावजूद इसके तीन दिन में भी जाति प्रमाण पत्र के आवेदन नही पहुंच पा रहे हैं। यदि आवेदन पहुंच रहे हैं तो एसडीएम मूल आवेदन प्राप्त न होने की बात क्यों लिखकर आवेदन निरस्त कर रहे हैं। आखिर गड़बड़ी कहां हो रही है। अब सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि दोनों ही सही कह रहे हैं तो आखिर आवेदन जा कहां रहे हैं, यह भी जांच का विषय है।

इनका कहना है

लॉकडाउन के पहले जो भी आवेदन आए थे वे संबंधित क्षेत्र के एसडीएम को भेजे गए थे। संबंधित क्षेत्र के एसडीएम आवेदन पर क्या निर्णय ले रहे है इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। आवेदन निरस्त होने पर कारण लिखा जाता है।

प्रसून सोनी, लोक सेवा प्रबंधक, भोपाल

Posted By: Nai Dunia News Network

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