अमित शर्मा, भोपाल। गर्भ समापन से लेकर नशे के लिए काम आने वालीं कई दवाओं की सीधी बिक्री पर सरकार ने प्रतिबंध लगा रखा है। ये शेड्यूल एच और एच-1 की वे दवाएं हैं जो बिना चिकित्सकों की पर्ची के दुकानदार बेच ही नहीं सकते। सरकार कहती है कि दुकानदार तभी यह दवा किसी व्यक्ति को देगा, जब वह डाक्टर का पर्चा दिखाएगा। इसके अलावा दुकानदार को बेची गई दवा का बिल देना होगा और इसका रिकार्ड भी अपने पास रखना होगा, लेकिन असल में ऐसा हो नहीं रहा। कमाई के फेर में दुकानदार बिना पर्ची देखे ये दवाएं धड़ल्ले से बेच रहे हैं। न बिल दे रहे हैं और न इनका रिकार्ड रख रहे हैं। ऐसे दुकानदारों पर निगरानी रखने वाले अधिकारी भी मिलीभगत के चलते ऐसे दवा व्यापारियों पर कार्रवाई नहीं कर रहे। नवदुनिया ने सच्चाई को सामने लाने के लिए एक स्‍टिंग आपरेशन किया। इसमें दिखाई दिया कि चिकित्सक के बिना पर्चे ही दवाएं दी जा रही हैं।

एम्स अस्पताल के सामने साकेत नगर : प्रशांत मेडिकल

रिपोर्टर: कुछ दवाएं चाहिए थीं

दुकानदार: कौन सी चाहिए आपको नाम बताएं

रिपोर्टर: टेलमा एच 40 एक पत्ता दे दें।

दुकानदार: ठीक है

रिपोर्टर : ऐसा करें पांच एलप्रेक्स पांच एमजी भी दे दें

दुकानदार: एलप्रेक्स 2.5 दे दूं, पांच एमजी का पत्ता है, इसे काटेंगे नहीं

रिपोर्टर: ऐसा करें आप पत्ता ही दे दें, कितने का है

दुकानदार: 60 रुपये का है दोनों के 150 रुपए दे दें।

रिपोर्टर : ठीक है।

गौतम नगर के पास आशीर्वाद मेडिकल

रिपोर्टर: एजीथ्रोमाइसिन टैबलेट दे देना

दुकानदार : कितनी दे दूं

रिपोर्टर : तीन गोली का पत्ता है, उसे दे दो

दुकानदार : हां

रिपोर्टर: एलप्रेक्स भी दे दो भाई

दुकानदार: नहीं है भाई उसका रिकार्ड रखना होता है। इसलिए गोली भी नहीं रखते। बाकी सब मिल जाएगी।

कस्तूरबा नगर - मेडीआनडोर

रिपोर्टर : क्लोनोफीट दे दें

दुकानदार: कितनी चाहिए है

रिपोर्टर : एक पत्ता दे दें

दुकानदार: (कर्मचारी से बात करने के बाद ) दवा खत्म हो गई है। बाद में मिल जाएगी

ये दवाएं ज्‍यादा खतरनाक

मिसोप्रोस्टोल एंड मिफेप्रिस्टोन : ये गर्भपात के लिए प्रयोग में ली जाती हैं, लेकिन डाक्टर के परामर्श के बाद। दवा दुकानों से खरीदकर लोग मर्जी से महिलाओं को खिला रहे हैं। अधिक दिन का गर्भ होने पर दवा लेने पर अधिक रक्तस्राव से महिला को जान का जोखिम भी हो सकता है।

आक्सीटोसिन : इस प्रतिबंधित इंजेक्शन का उपयोग दुधारू पशुओं का दूध निकालने में हो रहा है। जिले में इस इंजेक्शन का बड़ा कारोबार है। सब्जियों की ज्यादा और जल्दी पैदावार में भी इसका प्रयोग हो रहा है। इसी कारण इस इंजेक्शन की मांग सर्वाधिक है। ये मानव शरीर के लिए घातक है। इससे नपुंसकता और कैंसर जैसी बीमारियां हो सकती हैं।

कोरेक्स : यह खांसी की दवा है, लेकिन कई लोग इसका उपयोग नशे के लिए करते हैं। ज्यादा डोज लेने पर शरीर में नशा होने लगता है और शारीरिक क्षमता कम होती जाती है। सोचने समझने की क्षमता भी कम हो जाती है।

कोडीन और फेंसीडिल : ये भी खांसी की दवाएं हैं, जो बिना डाक्टर की पर्ची के नहीं दी जा सकती। ये दवाएं भी शरीर को नशा के कारण शिथिल करती हैं और नपुसंकता बढ़ाती हैं।

फोर्टविन-फेनार्गन : ये इंजेक्शन जीवन रक्षक दवाओं में शामिल हैं। असहनीय दर्द, उल्टी, एक्सीडेंट आदि के मरीजों को दिया जाता है। इसका उपयोग लोग नशे में कर रहे हैं। ड्रिप की तरह लेने से ज्यादा नशा होता है। लगातार लेने से शारीरिक अक्षमता बढ़ती है।

गर्भ समापन : यह है नियम

गर्भ समापन अधिनियम 1971 (एमटीपी एक्ट-1971) तथा ड्रग्स एंड कास्मेटिक एक्ट के अंतर्गत बिना डाक्टर के परामर्श के शेड्यूल-एच की दवा खरीदते समय दुकानदार को मान्य रसीद प्राप्त करनी होती है। इसमें औषधि का नाम, बैच संख्या और औषधि उत्पादनकर्ता की जानकारी दो साल तक सुरक्षित रखनी होती है। साथ ही इन औषधियों को बेचते समय ग्राहक का विवरण, मात्रा, चिकित्सक का नाम, मूल्य आदि का विवरण तीन साल तक अपने रिकार्ड में सुरक्षित रखने का प्राविधान है। ऐसा ही प्राविधान शैड्यूल एच-1 में शामिल 46 दवाओं का है।

अभी बिना पर्चे के दी जा सकती हैं 16 दवाएं

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अभी 16 दवाएं हैं जो बिना पर्चे के दी जा सकती हैं। इनमें पैरासिटामाल 500, कुछ लेग्जेटिव्स और फंगल क्रीम शामिल हैं। वर्तमान में भी कई दवाएं मेडिकल स्टोर पर बिना डाक्टर की पर्ची के भी मिल जाती हैं, लेकिन इसके लिए अभी कोई प्रापर कानून या नियम नहीं है।

इस तरह से बिना पर्चा दवाएं देना कानूनी तौर पर गलत है। हम ऐसे लोगों पर सख्ती से कार्रवाई करेंगे। सभी इंस्पेक्टर से बात कर कार्रवाई की योजना तैयार करेंगे।

- तबस्सुम मरोठा, ड्रग इंस्पेक्टर, भोपाल

Posted By: Ravindra Soni

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